एक अनजान कॉल और एक गलत बटन... और आपकी मेहनत की कमाई हो सकती है गायब! जानिए क्या है ये खतरनाक 'कॉल मर्जिंग स्कैम'

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ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी की दुनिया में धोखेबाज हर दिन नए-नए और शातिर तरीके ईजाद कर रहे हैं। अब तक हम सभी OTP (One-Time Password) किसी से साझा न करने को लेकर सतर्क हुए ही थे कि ठगों ने इससे भी एक कदम आगे का रास्ता निकाल लिया है। अब वे आपसे OTP मांगते नहीं, बल्कि आपकी ही मदद से उसे 'सुन' लेते हैं। जी हां, इस नए और बेहद खतरनाक तरीके का नाम है 'कॉल मर्जिंग स्कैम' (Call Merging Scam)

यह एक ऐसा धोखा है जिसमें अपराधी आपको फोन पर उलझाकर आपकी ही कॉल को किसी दूसरी कॉल के साथ जोड़ने (Merge) के लिए कहते हैं, और जैसे ही आप ऐसा करते हैं, आपके बैंक खाते की गोपनीय जानकारी उन तक पहुंच जाती है। यह घोटाला इतनी चालाकी से किया जाता है कि आम इंसान को भनक तक नहीं लगती कि उसके साथ क्या हो रहा है।

आइए, इस नए ऑनलाइन फ्रॉड को परत-दर-परत समझते हैं और जानते हैं कि आप इससे खुद को और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

क्या है 'कॉल मर्जिंग स्कैम' और कैसे काम करता है?

'कॉल मर्जिंग' या 'कॉल कॉन्फ्रेंसिंग' एक सामान्य फीचर है जो लगभग हर स्मार्टफोन में होता है। इसका इस्तेमाल एक ही समय में दो या दो से अधिक लोगों से बात करने के लिए किया जाता है। साइबर ठग इसी सीधे-सादे फीचर को अपने हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

फ्रॉड के स्टेप्स:

  1. पहली कॉल: सबसे पहले, ठग आपको फोन करता है। वह खुद को किसी बैंक का कर्मचारी, किसी ई-कॉमर्स कंपनी (जैसे Amazon, Flipkart) का डिलीवरी एजेंट, या किसी टेलीकॉम कंपनी (जैसे Jio, Airtel) का अधिकारी बता सकता है।
  2. भरोसा जीतना और समस्या बताना: वह आपसे बहुत ही पेशेवर तरीके से बात करेगा और कोई नकली समस्या बताएगा। जैसे, "सर, आपका एक KYC पेंडिंग है," या "आपका ऑर्डर कैंसिल हो गया है, रिफंड के लिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी," या "आपके बिजली बिल का भुगतान फेल हो गया है।"
  3. असली ट्रिक की शुरुआत: इसके बाद वह आपकी मदद करने का नाटक करेगा और कहेगा कि आपको कंपनी के 'वेरिफिकेशन डिपार्टमेंट' या 'सीनियर अधिकारी' से बात करनी होगी। वह आपको एक नंबर देगा (जो असल में उसी के साथी का होता है) या कभी-कभी तो वह आपको बैंक का असली कस्टमर केयर नंबर डायल करने को कहेगा ताकि आपको शक न हो।
  4. 'मर्ज कॉल' का निर्देश: यही इस स्कैम का सबसे खतरनाक हिस्सा है। ठग आपसे कहेगा, "सर, मेरी कॉल को काटिएगा नहीं, इसे होल्ड पर रखकर दिए गए नंबर पर कॉल करें और फिर दोनों कॉल्स को मर्ज कर दें।" कई लोग जो इस फीचर से अनजान होते हैं, वे उसकी बताई प्रक्रिया का पालन करते हैं।
  5. OTP की चोरी: जैसे ही आप कॉल मर्ज करते हैं, ठग कॉन्फ्रेंस कॉल में तीसरे व्यक्ति के रूप में शामिल हो जाता है और आपकी सारी बातें चुपचाप सुनने लगता है। अब जब असली कस्टमर केयर या ठग का साथी आपसे वेरिफिकेशन के लिए आपके मोबाइल पर आया OTP पूछता है या IVR पर डालने को कहता है, तो यह OTP ठग भी सुन लेता है और तुरंत इसका इस्तेमाल करके आपके खाते से पैसे उड़ा लेता है।

संबंधित खतरा: 'कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम' (*401*)

कॉल मर्जिंग जैसा ही एक और खतरनाक स्कैम है 'कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम'। इसमें ठग आपसे कुछ USSD कोड्स जैसे *401* या *402* के बाद अपना मोबाइल नंबर डायल करने को कहता है। वह बहाना बना सकता है कि इससे आपकी कोई सर्विस एक्टिवेट हो जाएगी। लेकिन असल में, यह कोड आपके नंबर की सभी इनकमिंग कॉल्स को ठग के नंबर पर फॉरवर्ड (Divert) कर देता है। इसके बाद आपके बैंक से आने वाले OTP कॉल्स भी सीधा ठग के पास पहुंच जाते हैं।

इस नए ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचें? (Safety Tips)

थोड़ी सी जागरूकता आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। इन बातों को हमेशा याद रखें:

  • कभी भी कॉल मर्ज न करें: अगर कोई अनजान व्यक्ति आपको फोन पर किसी दूसरी कॉल को मर्ज करने के लिए कहता है, तो यह 100% एक फ्रॉड है। तुरंत फोन काट दें।
  • बैंक कर्मचारी कभी ऐसा नहीं कहते: याद रखें, कोई भी बैंक, वॉलेट कंपनी या प्रतिष्ठित संस्था आपको कभी भी कॉल मर्ज करने, कोई अनजान ऐप डाउनलोड करने या कोई USSD कोड डायल करने के लिए नहीं कहती है।
  • एक कॉल काट कर ही दूसरी मिलाएं: अगर आपको किसी कस्टमर केयर पर बात करनी भी है, तो हमेशा पहली कॉल को पूरी तरह से डिस्कनेक्ट करने के बाद ही नया नंबर डायल करें।
  • OTP और गोपनीय जानकारी साझा न करें: यह नियम आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अपना OTP, CVV, UPI पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड कभी भी किसी के साथ फोन पर, SMS पर या व्हाट्सएप पर साझा न करें।
  • अज्ञात USSD कोड्स से बचें: * या # से शुरू होने वाले किसी भी कोड को किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर डायल न करें।
  • फ्रॉड होने पर तुरंत एक्शन लें: अगर गलती से आपके साथ कोई धोखाधड़ी हो भी जाती है, तो घबराएं नहीं। तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, अपने बैंक को भी तुरंत सूचित करके अपने कार्ड्स और अकाउंट को ब्लॉक करवाएं।

साइबर ठग हमारी अज्ञानता का ही फायदा उठाते हैं। इसलिए, खुद भी जागरूक रहें और यह जानकारी अपने दोस्तों और परिवार, विशेषकर घर के बुजुर्गों के साथ ज़रूर साझा करें।

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