जंग के बीच भारत का मास्टरस्ट्रोक तेल संकट के खौफ में चीन को पछाड़ा, इस देश से खरीद डाला रिकॉर्ड कच्चा तेल
News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व में भड़के भू-राजनीतिक संघर्ष और दुनिया भर में मंडरा रहे तेल संकट के खौफ के बीच भारत ने व्यापारिक मोर्चे पर एक बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' चला है। अपनी ऊर्जा सुरक्षा को अभेद्य बनाते हुए भारत ने कच्चे तेल की खरीदारी में चीन और अमेरिका जैसे सुपरपावर देशों को भी पछाड़ दिया है। भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने एक बेहद स्मार्ट दांव खेलते हुए वेनेजुएला से तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा दिया है। इस झटकेदार फैसले के साथ ही भारत अब वेनेजुएला के कच्चे तेल का दुनिया में सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है।
मार्च के आंकड़ों में बंपर उछाल, 4 गुना बढ़ गया आयात वैश्विक समुद्री खुफिया फर्मों और शिपिंग ट्रैकिंग डेटा ने दुनिया भर के तेल बाजार के जो आंकड़े पेश किए हैं, वह हैरान करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले मार्च महीने में वेनेजुएला से भारत को भेजे गए कच्चे तेल के शिपमेंट में सीधे चार गुना से ज्यादा का बंपर उछाल दर्ज किया गया है। दरअसल, जब अमेरिका ने इस लैटिन अमेरिकी देश की तेल बिक्री पर शिकंजा कसा था, तब सबसे बड़े खरीदार चीन ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे। चीन के पीछे हटते ही जो गैप बना, उसे भारत ने बेहद तेजी से भर दिया और इस रेस में सबको पीछे छोड़ दिया।
रिलायंस और IOCL जैसी दिग्गज कंपनियां खेल रही हैं बड़ा दांव वेनेजुएला से तेल खरीदने के इस महाअभियान का नेतृत्व भारत की सरकारी और निजी क्षेत्र की दिग्गज रिफाइनरी कंपनियां कर रही हैं। मार्च लोडिंग के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों ने मिलकर 3,43,000 बैरल प्रतिदिन की भारी-भरकम दर से कच्चे तेल की खरीदारी की है। युद्ध के कारण मध्य पूर्व से होने वाली सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा लगातार बना हुआ है। ऐसे में भारतीय कंपनियों की यह आक्रामक रणनीति देश को किसी भी बड़े ईंधन संकट से बचाने के लिए एक 'सुरक्षा कवच' का काम कर रही है।
वेनेजुएला का उत्पादन पहुंचा 5 साल के सबसे उच्चतम स्तर पर भारतीय कंपनियों की इस जबर्दस्त मांग का सीधा फायदा वेनेजुएला की इकॉनमी को मिल रहा है। वर्तमान में वेनेजुएला का देशव्यापी तेल निर्यात 8,90,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जो दिसंबर 2019 के बाद से इसका सबसे उच्चतम स्तर है। वेनेजुएला के तेल उत्पादन में इस भारी उछाल के पीछे 'डाइल्यूएंट्स' (Diluents) का सबसे अहम रोल है। ये विशेष प्रकार के रासायनिक योजक होते हैं, जिन्हें वेनेजुएला के बेहद भारी और तारकोल जैसे गाढ़े कच्चे तेल में मिलाया जाता है। इसके मिलते ही गाढ़ा तेल पतला हो जाता है और उसे पाइपलाइनों के जरिए आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।