भारत के बिना अधूरा है अमेरिका का सपना ,क्वाड बैठक से पहले मार्को रुबियो का बड़ा बयान
News India Live, Digital Desk: वैश्विक राजनीति के पटल पर भारत की धमक एक बार फिर सुनाई दी है। अमेरिका के भावी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत के सहयोग के बिना अमेरिका की आकांक्षाएं और वैश्विक लक्ष्य पूरे नहीं हो सकते। आगामी 'क्वाड' (QUAD) शिखर सम्मेलन में शामिल होने से पहले रुबियो का यह बयान हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में भारत की बढ़ती शक्ति और अपरिहार्यता को रेखांकित करता है। जानकारों का मानना है कि रुबियो का यह रुख बीजिंग के लिए स्पष्ट चेतावनी है।
क्वाड बैठक में शामिल होंगे रुबियो, द्विपक्षीय संबंधों पर जोर
अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद जो बाइडेन प्रशासन और आने वाली टीम के बीच तालमेल के बीच मार्को रुबियो का क्वाड बैठक में शामिल होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि चाहे तकनीक का क्षेत्र हो, रक्षा सहयोग हो या फिर समुद्र में सुरक्षा की बात, भारत एक ऐसा साझेदार है जिसे नजरअंदाज करना नामुमकिन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले दशक में वाशिंगटन और नई दिल्ली की दोस्ती ही दुनिया की दिशा तय करेगी।
चीन की घेराबंदी और भारत की रणनीतिक भूमिका
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों को रोकने के लिए 'क्वाड' (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) एक मजबूत ढाल बनकर उभरा है। मार्को रुबियो, जो चीन के प्रति अपने सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं, का मानना है कि भारत इस गठबंधन की रीढ़ है। रुबियो के अनुसार, अमेरिका को अपनी सप्लाई चेन और सामरिक सुरक्षा के लिए भारत पर भरोसा बढ़ाना होगा। यह बयान उस समय आया है जब दक्षिण चीन सागर में तनाव चरम पर है और दुनिया एक स्थिर शक्ति की तलाश में है।
आर्थिक और तकनीक के मोर्चे पर साथ आएंगे दोनों देश
सिर्फ सैन्य ही नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी रुबियो ने भारत को अमेरिका का सबसे विश्वसनीय साथी बताया। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में 'क्रिटिकल टेक्नोलॉजी' (iCET) और सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत और अमेरिका के बीच बड़े समझौते हो सकते हैं। रुबियो का यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका अब भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक बराबर के रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है, जिसके बिना 'अमेरिकन ड्रीम' को सुरक्षित रखना कठिन है।