J&K Politics : पुलवामा में महबूबा की हुंकार उमर अब्दुल्ला पर साधा निशाना, ईरान-इजराइल तनाव
News India Live, Digital Desk: जम्मू-कश्मीर की सियासत में चुनावी पारा चढ़ने के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला बोला। महबूबा ने न केवल स्थानीय मुद्दों पर उमर को घेरा, बल्कि वैश्विक मंच पर चल रहे ईरान-इजराइल और अमेरिका के तनाव पर भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।
उमर अब्दुल्ला पर बरसीं महबूबा: "सत्ता के लिए सिद्धांतों से समझौता"
महबूबा मुफ्ती ने पुलवामा की रैली में उमर अब्दुल्ला का नाम लिए बिना उन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने हमेशा कश्मीर के हितों की अनदेखी कर अपनी सत्ता बचाने को प्राथमिकता दी है। महबूबा ने कहा, "कुछ लोग केवल दिल्ली की कुर्सी के लिए कश्मीरियों के जज्बात से खेलते हैं। जब वे सत्ता में होते हैं तो भाषा कुछ और होती है, और जब बाहर होते हैं तो उन्हें कश्मीरियत याद आती है।"
ईरान-इजराइल तनाव पर चिंता: "दुनिया को शांति की जरूरत"
अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हालातों पर टिप्पणी करते हुए महबूबा मुफ्ती ने ईरान और अमेरिका/इजराइल के बीच बढ़ती तल्खी पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में युद्ध की आहट पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है। उन्होंने शांति वार्ता (Peace Talks) का समर्थन करते हुए कहा कि जंग कभी किसी मसले का हल नहीं हो सकती। महबूबा के मुताबिक, "अगर दुनिया में कहीं भी अशांति होती है, तो उसका असर कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों पर भी पड़ता है।"
पुलवामा में पीडीपी का शक्ति प्रदर्शन
पुलवामा, जिसे पीडीपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, वहां इस रैली में भारी भीड़ उमड़ी। महबूबा मुफ्ती ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि उनकी लड़ाई कश्मीर की पहचान और स्वाभिमान को वापस दिलाने की है। उन्होंने अनुच्छेद 370 के हटने के बाद के हालातों पर चर्चा करते हुए कहा कि कश्मीरियों को खामोश जरूर किया गया है, लेकिन उनके जज्बात आज भी वही हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच बढ़ती खाई
आगामी चुनावों को देखते हुए 'इंडिया गठबंधन' (I.N.D.I.A Alliance) में शामिल होने के बावजूद कश्मीर में एनसी और पीडीपी के बीच की खींचतान अब सार्वजनिक हो गई है। उमर अब्दुल्ला के बयानों का जवाब जिस आक्रामकता से महबूबा दे रही हैं, उससे साफ है कि कश्मीर घाटी में चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद कड़ा होने वाला है।
प्रमुख मुद्दे:
स्थानीय पहचान: महबूबा ने एक बार फिर कश्मीरी युवाओं की रिहाई और नागरिक अधिकारों का मुद्दा उठाया।
वैश्विक शांति: ईरान-इजराइल विवाद पर भारत सरकार से मध्यस्थता की अपील के संकेत।
चुनावी समीकरण: पुलवामा और शोपियां जैसे बेल्ट में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश।