अमेरिका का रक्षा बजट 1 ट्रिलियन डॉलर के पार, क्या दुनिया सच में किसी बड़े युद्ध की तैयारी में है?
News India Live, Digital Desk: जब हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश की बात करते हैं, तो अक्सर हमारी नज़र उसकी अर्थव्यवस्था या हथियारों पर होती है। लेकिन हाल ही में अमेरिका ने अपने रक्षा बजट (Defense Budget) को लेकर जो आंकड़ा पेश किया है, उसने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों को सोच में डाल दिया है। अमेरिका ने 2027 के लिए अपने रक्षा बजट को 1 ट्रिलियन डॉलर से भी ऊपर पहुँचाने की तैयारी कर ली है। अगर हम इसे भारतीय रुपये में बदलें, तो यह रकम इतनी बड़ी है कि एक आम इंसान के लिए गिनना भी मुश्किल हो जाए।
भारत और अमेरिका की तुलना: एक बड़ी खाई
अगर हम भारत के 2025 के रक्षा बजट को देखें, तो भारत अपनी सेना के आधुनिकीकरण और सुरक्षा पर काफी पैसा खर्च कर रहा है। लेकिन अमेरिका का 2027 का प्रस्तावित बजट भारत के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। जहाँ भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा और 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी हथियारों पर ज़ोर दे रहा है, वहीं अमेरिका का फोकस स्पेस वॉरफेयर, एआई (AI) संचालित हथियार और हाइपरसोनिक मिसाइलों जैसी भविष्य की तकनीकों पर है।
आखिर अमेरिका इतना पैसा क्यों बहा रहा है?
सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका को इतने 'अथाह' पैसे की ज़रूरत क्यों पड़ रही है? इसके पीछे दो बड़े कारण साफ़ नज़र आते हैं—रूस और चीन। पिछले कुछ सालों में ग्लोबल पॉलिटिक्स जिस करवट बैठी है, उसने वाशिंगटन को अपनी ताकत बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है। यूक्रेन युद्ध हो या ताइवान के करीब बढ़ता चीन का दबदबा, अमेरिका दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह अपनी सैन्य बढ़त खोना नहीं चाहता।
क्या केवल पैसों से जीती जाती हैं जंग?
यह एक बहस का विषय है। भारत के पास अमेरिका जितनी दौलत भले न हो, लेकिन भारत की रणनीति 'किफायती और सटीक' हथियारों पर है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया है कि सिर्फ महंगा होना किसी हथियार के 'विजयी' होने की गारंटी नहीं है। फिर भी, अमेरिका का यह '1 ट्रिलियन डॉलर वाला दांव' साफ़ संकेत है कि आने वाला समय तकनीक और हथियारों की बहुत बड़ी होड़ लेकर आने वाला है।
एक चिंताजनक तस्वीर
पूरी दुनिया में रक्षा पर बढ़ता खर्च यह भी बताता है कि हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ शांति समझौतों से ज़्यादा भरोसे हथियारों पर किया जा रहा है। 1 ट्रिलियन डॉलर की यह रकम शिक्षा, स्वास्थ्य या गरीबी मिटाने में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकती थी, यह एक अलग पहलू है, लेकिन फिलहाल सुपरपावर की रेस में हथियारों की आवाज़ सबसे तेज़ है