Amalaki Ekadashi 2026 : 27 फरवरी को है रंगभरी एकादशी, इस दिन भूलकर भी न करें ये 4 काम वरना रूठ जाएंगी मां लक्ष्मी

Post

News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और जब बात फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) की हो, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसे 'रंगभरी एकादशी' और 'आंवला एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में यह शुभ तिथि 27 फरवरी को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ शिव-पार्वती की भी विशेष पूजा की जाती है, लेकिन व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

एकादशी पर वर्जित हैं ये 4 काम (Don'ts on Ekadashi)

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें करने से व्रत का फल निष्फल हो जाता है और घर में दरिद्रता आती है:

बाल और नाखून काटना: एकादशी के दिन बाल धोना, बाल काटना या नाखून काटना सख्त मना है। ऐसा करने से ग्रह दोष लगता है।

कपड़े धोना: इस दिन साबुन का प्रयोग कर कपड़े धोने से बचना चाहिए। माना जाता है कि पानी में रहने वाले सूक्ष्म जीवों की हत्या का पाप लगता है।

चावल का सेवन: एकादशी पर चावल खाना वर्जित है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन चावल खाना 'महर्षि मेधा के मांस' के सेवन के समान माना गया है।

तुलसी दल तोड़ना: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। आप एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख सकते हैं।

अमलकी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि (Shubh Muhurat)

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल एकादशी की तिथि का विवरण इस प्रकार है:

एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 फरवरी 2026, शाम से।

एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026, शाम तक।

उदया तिथि: उदया तिथि के अनुसार, व्रत 27 फरवरी को ही रखा जाएगा।

पारण का समय: 28 फरवरी की सुबह शुभ समय में व्रत खोलना श्रेष्ठ होगा।

क्यों कहते हैं इसे 'रंगभरी एकादशी'?

यह एकमात्र ऐसी एकादशी है जिसका संबंध भगवान विष्णु के साथ-साथ महादेव से भी है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी (वाराणसी) आए थे। इसीलिए काशी में इस दिन बाबा विश्वनाथ को अबीर-गुलाल चढ़ाया जाता है और होली का उत्सव शुरू हो जाता है।

आंवले के पेड़ की पूजा का महत्व

अमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। माना जाता है कि आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है। इस दिन आंवले का फल खाना और उसे दान करना मोक्ष प्रदायक माना गया है।