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April 05 2026 02:30 am

इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: बरेली के DM और SSP को अवमानना मामले में किया तलब, पेश न होने पर जारी होगा गैर-जमानती वारंट

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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाते हुए बरेली के जिलाधिकारी (DM) अविनाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अनुराग आर्य को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह सख्त कदम एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए उठाया है। माननीय न्यायालय ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अधिकारी नियत समय पर हाजिर नहीं होते हैं, तो गैर-जमानती वारंट (NBW) के जरिए उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

23 मार्च को दोपहर 2 बजे होगी आखिरी सुनवाई

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने इस मामले को अंतिम आदेश के लिए 23 मार्च 2026 को दोपहर 2:00 बजे सूचीबद्ध किया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अधिकारियों को कोर्ट में सीधे पेश होना होगा और किसी भी प्रकार के बहानेबाजी पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है पूरा विवाद? घर में नमाज और 'बुलडोजर' की धमकी

मामला बरेली के मोहम्मद गंज गांव का है। आरोप है कि 16 जनवरी 2026 को हसीन खान नाम के व्यक्ति के घर में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग सामूहिक नमाज पढ़ रहे थे। पड़ोस के हिंदू परिवारों की शिकायत पर पुलिस ने वहां पहुंचकर नमाज रुकवा दी थी।

याचिकाकर्ता हसीन खान का आरोप है कि पुलिस उन्हें नमाज पढ़ते समय उठा ले गई और उनका चालान कर दिया। इतना ही नहीं, याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में कुछ प्रभावशाली लोगों ने उन्हें डराया कि यदि वे कोर्ट में पुलिस के खिलाफ बोले, तो उनके घर पर 'बुलडोजर' चलवा दिया जाएगा। हसीन खान ने अदालत को बताया कि वे अनपढ़ हैं और उनसे डरा-धमका कर कुछ कागजों पर अंगूठा लगवा लिया गया था।

कोर्ट ने दी 24 घंटे की सशस्त्र सुरक्षा

सुनवाई के दौरान हसीन खान ने अपनी जान और संपत्ति को खतरा बताते हुए अदालत से सुरक्षा की गुहार लगाई। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया कि हसीन खान को तत्काल प्रभाव से 24 घंटे के लिए दो सशस्त्र गार्ड (Gunners) मुहैया कराए जाएं। ये गार्ड हर जगह उनके साथ रहेंगे। कोर्ट ने आदेश की कॉपी महाधिवक्ता कार्यालय को भेजने का निर्देश दिया है ताकि सुरक्षा व्यवस्था आज से ही सुनिश्चित की जा सके।

सरकार की दलील: शिकायत पर की गई कार्रवाई

वहीं, सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि 16 जनवरी को निजी संपत्ति में नमाज की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन स्थानीय विवाद और अन्य परिवारों की शिकायत के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने दखल दिया था। अब सभी की निगाहें 23 मार्च पर टिकी हैं, जब बरेली के आला अधिकारी हाईकोर्ट के कटघरे में खड़े होकर अपना स्पष्टीकरण देंगे।