अकाली दल का दबदबा कायम, हरजिंदर सिंह धामी 5वीं बार बने SGPC के प्रधान
News India Live, Digital Desk : सिखों की सर्वोच्च संस्था और 'मिनी संसद' कही जाने वाली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रधान पद पर एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के उम्मीदवार हरजिंदर सिंह धामी ने बड़ी जीत हासिल की है। यह लगातार पाँचवीं बार है जब एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी को SGPC का अध्यक्ष चुना गया है। उन्होंने इस चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी और पंथक गुट के उम्मीदवार बीबी महिंदर कौर को करारी शिकस्त दी।
यह चुनाव सिर्फ़ एक अध्यक्ष का चुनाव नहीं था, बल्कि इसे पंथक राजनीति में शिरोमणि अकाली दल के प्रभाव और पकड़ के एक बड़े इम्तिहान के तौर पर देखा जा रहा था, जिसमें अकाली दल एक बार फिर सफल साबित हुआ।
कैसे हुई धामी की जीत?
SGPC के अध्यक्ष पद के लिए हुए इस चुनाव में कुल 180 वोट पड़े। हरजिंदर सिंह धामी को इन वोटों में से 153 वोट हासिल हुए, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी बीबी महिंदर कौर को सिर्फ़ 21 वोट ही मिल सके। 6 वोट रद्द कर दिए गए। इस एकतरफा जीत ने यह साफ़ कर दिया कि SGPC के सदन में अभी भी अकाली दल का दबदबा मज़बूती से कायम है।
चुनाव की प्रक्रिया अमृतसर स्थित तेजा सिंह समुंदरी हॉल में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह और एसजीपीसी के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
कौन हैं हरजिंदर सिंह धामी?
एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी सिख पंथ के एक बड़े और सम्मानित नेता माने जाते हैं और पेशे से एक वकील हैं। वे लंबे समय से अकाली दल के साथ जुड़े हुए हैं। SGPC के अध्यक्ष के तौर पर उनका कार्यकाल काफी चुनौतियों भरा रहा है, जिसमें सिख धर्म से जुड़े कई संवेदनशील और राजनीतिक मुद्दों पर उन्होंने पंथ का नेतृत्व किया है। उनकी लगातार पाँचवीं बार इस पद पर जीत यह दर्शाती है कि अकाली दल और SGPC के ज़्यादातर सदस्यों का उन पर अटूट विश्वास है।
क्या है SGPC और क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, जिसे अक्सर सिखों की 'मिनी संसद' भी कहा जाता है, एक बहुत ही शक्तिशाली और प्रभावशाली संस्था है। यह भारत और दुनिया भर के ऐतिहासिक गुरुद्वारों (जिनमें अमृतसर का स्वर्ण मंदिर भी शामिल है) के प्रबंधन और रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार है। इसके अलावा, यह सिखों की धार्मिक, सामाजिक और शैक्षिक गतिविधियों का भी नेतृत्व करती है।
SGPC का अध्यक्ष पद सिख समुदाय के सबसे प्रतिष्ठित पदों में से एक माना जाता है, और इस पर जिसका नियंत्रण होता है, उसका पंजाब की पंथक और राजनीतिक दिशा पर गहरा प्रभाव होता है। यही कारण है कि इस चुनाव पर पूरे देश की नज़रें टिकी होती हैं।