Airbus Recall : जिसे आप सबसे सुरक्षित मानते थे, उस विमान को वापस बुलाने की तैयारी? भारत में हड़कंप
News India Live, Digital Desk : अगर आप अक्सर फ्लाइट से सफर करते हैं, तो यह खबर आपको थोड़ा हैरान और शायद थोड़ा परेशान भी कर सकती है। भारत में हम और आप जिस प्लेन में सबसे ज्यादा बैठते हैं चाहे वो इंडिगो हो, एयर इंडिया हो या विस्तारा ज्यादातर एयरलाइंस Airbus A320 परिवार के विमान ही इस्तेमाल करती हैं। अब खबर यह आ रही है कि दुनिया की इस सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली फ्लाइट मशीन में एक अजीबोगरीब खामी पकड़ में आई है। और खामी भी ऐसी, जिसे सुनकर कोई भी माथा पकड़ ले "सूरज की चकाचौंध"।
आखिर मामला क्या है?
सुनने में यह किसी मजाक जैसा लगता है, लेकिन यह हकीकत है। रिपोर्ट के मुताबिक, Airbus A320 सीरीज के विमानों के फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम में एक तकनीकी दिक्कत पाई गई है। आसान भाषा में समझें तो, जब विमान हवा में होता है और सूरज की तेज रोशनी एक खास कोण (Angle) से विमान के सेंसर पर पड़ती है, तो मशीन कंफ्यूज हो जाती है।
विमान के 'सेंसर्स' इस धूप को गलत तरीके से पढ़ लेते हैं। इसका नतीजा यह हो सकता है कि विमान का ऑटो-पायलट सिस्टम अचानक काम करना बंद कर दे या फिर प्लेन खुद-ब-खुद नीचे की ओर गोता (Dive) लगाने लगे। सोचिए, 30-35 हजार फीट की ऊंचाई पर अगर ऐसा हो जाए, तो पायलट और यात्रियों की जान हलक में आना तय है।
भारतीय उड़ानों पर क्या होगा असर?
यह खबर भारत के लिए इसलिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारा पूरा एविएशन सेक्टर इसी विमान (Airbus A320 Neo/Ceo) की पीठ पर खड़ा है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के पास इनका विशाल बेड़ा है, और एयर इंडिया भी इनका जमकर इस्तेमाल करती है।
इस "सन ग्लेयर" (Sun Glare) वाली दिक्कत के चलते हजारों विमानों को चेक किया जा सकता है या उनके सॉफ्टवेयर/हार्डवेयर में बदलाव की नौबत आ सकती है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि अभी तक भारत में इस वजह से किसी बड़े हादसे की खबर नहीं आई है, लेकिन रिस्क तो रिस्क है।
कंपनी क्या कह रही है? (रिकॉल का मतलब)
एविएशन की दुनिया में सुरक्षा ही सबकुछ है। जब भी ऐसी कोई गड़बड़ी पकड़ी जाती है, तो उसे 'रिकॉल' या सख्त 'चेकिंग' के दायरे में लाया जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि कल से सारे प्लेन जमीन पर खड़े हो जाएंगे। इसका मतलब है कि एयरबस और दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियां अब इस 'सन-ग्लेयर' वाली समस्या को ठीक करने के लिए पुराने पुर्जों को बदल सकती हैं या सेंसर की जगह को एडजेस्ट कर सकती हैं।
आपको डरना चाहिए या नहीं?
देखिए, घबराने की जरूरत नहीं है। हवाई सफर आज भी यात्रा का सबसे सुरक्षित साधन है। हमारे पायलट्स को हर तरह की स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग मिलती है। अगर सेंसर गड़बड़ करते भी हैं, तो पायलट मैनुअल मोड में विमान को कंट्रोल कर सकते हैं।
लेकिन हाँ, यह खबर एक रिमाइंडर जरूर है कि तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, कुदरत (जैसे सूरज की रोशनी) के आगे मशीनें कभी-कभी बेबस हो ही जाती हैं। डीजीसीए (DGCA) और भारतीय एयरलाइंस इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती हैं, इस पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल, अगर आप खिड़की वाली सीट पर हैं, तो नज़ारों का मजा लीजिये, बाकी काम पायलट पर छोड़ दीजिये