राजस्थान के बेरोजगार युवाओं के लिए फिर एक चौंकाने वाली खबर नकल के हाई टेक खेल का भंडाफोड़

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News India Live, Digital Desk : राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी करना आजकल लोहे के चने चबाने जैसा हो गया है। पेपर मुश्किल हो, वो तो चल जाता है, लेकिन जब खबर आए कि कोई "मुन्ना भाई" हाई-टेक गैजेट्स लगाकर नकल कर रहा है, तो ईमानदारी से पढ़ने वाले छात्रों का खून खौल उठता है। अभी हाल ही में हुए क्लर्क (Clerk) एग्जाम में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसे देखकर एसओजी (SOG) की टीम भी दंग रह गई।

बनियान के बटन में कैमरा! यह क्या मजाक है?

मामला इतना फिल्मी है कि आपको यकीन नहीं होगा। SOG ने एक ऐसे गिरोह और परीक्षार्थियों को पकड़ा है जो परीक्षा हॉल को किसी जासूसी फिल्म का सेट समझ बैठे थे। पकड़े गए आरोपियों ने नकल करने के लिए सारी हदें पार कर दी थीं।

  • जासूसी बनियान: इन्होंने अपनी बनियान (Vest) में बटन की जगह एक बेहद छोटा और बारीक 'स्पाई कैमरा' (Spy Camera) फिट कर रखा था।
  • काम कैसे करता था? जैसे ही पेपर सामने आता, ये लड़के सीने पर लगे कैमरे से प्रश्न पत्र को स्कैन कर लेते।
  • बाहर बैठे थे 'सॉल्वर': स्कैन की हुई इमेज सीधे एग्जाम सेंटर के बाहर बैठे इनके साथियों के पास पहुँचती। वहां से वो सवालों के जवाब ढूँढते और वापस अंदर भेजते।

कान में 'मक्खी' जितना छोटा ब्लूटूथ

जवाब सुनने के लिए इन्होंने कान में इतना छोटा ब्लूटूथ डिवाइस लगा रखा था, जिसे सामान्य नज़रों से देख पाना नामुमकिन था। बाहर से आंसर आते और ये बड़े मजे से अपनी OMR शीट भरते। इसे 'ब्लूटूथ चीटिंग' (Bluetooth Cheating) कहते हैं, जो राजस्थान में एक बीमारी की तरह फ़ैल रही है।

SOG की रडार पर कैसे आए?

शुक्र है राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) का, जिनकी ख़ुफ़िया तंत्र ने काम कर दिया। उन्हें भनक लग गई थी कि कुछ सेंटर्स पर बड़ा खेल होने वाला है। परीक्षा शुरू होने से पहले और दौरान ही पुलिस ने दबिश दी और इन "नकली होनहारों" को रंगे हाथों दबोच लिया। इनके पास से जो गैजेट्स मिले हैं, उन्हें देखकर लगता है कि इन्होंने पढ़ाई से ज्यादा पैसा इन उपकरणों पर खर्च किया है।

मेहनती छात्रों का क्या कसूर?

जब भी ऐसी खबरें आती हैं, तो सबसे ज्यादा अफ़सोस उन लाखों बच्चों को होता है जो रात-दिन लाइब्रेरी में बैठकर मेहनत करते हैं। सोचिये, अगर ये पकड़े न जाते, तो एक अयोग्य व्यक्ति सिस्टम में घुस जाता और किसी हकदार की नौकरी खा जाता।

सरकार ने सख्त कानून तो बनाए हैं, लेकिन नक़ल माफिया भी हर बार 'तू डाल-डाल, मैं पात-पात' वाली कहावत सच कर देता है। राहत की बात बस इतनी है कि इस बार पुलिस की मुस्तैदी काम आ गई।

सीख:
शॉर्टकट से नौकरी तो शायद मिल जाए (हालांकि अब वो भी मुश्किल है), लेकिन इज़्ज़त नहीं। जेल की हवा खाने से बेहतर है, थोड़ी और मेहनत कर ली जाए।