"पार्टनर के बाद गोविंदा अहंकारी हो गए थे..." - दोस्त पहलाज निहलानी ने खोला 'हीरो नंबर 1' के डूबते करियर का सबसे बड़ा राज

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एक दौर था जब बॉलीवुड पर सिर्फ एक ही 'नंबर 1' का राज था - गोविंदा! उनकी कॉमेडी, उनका डांस, उनका स्टाइल... सब कुछ ऐसा था कि प्रोड्यूसर्स उनके घर के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते थे। गोविंदा का नाम ही फिल्म के हिट होने की गारंटी हुआ करता था।

लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि देखते ही देखते यह 'हीरो नंबर 1' कहीं गुमनामी के अंधेरे में खो गया?

इस सवाल पर हमेशा कई तरह की अटकलें लगाई जाती रहीं। किसी ने कहा कि गोविंदा का वक्त खत्म हो गया था, तो किसी ने उनकी निजी जिंदगी को दोष दिया। लेकिन अब, सालों बाद, गोविंदा के सबसे करीबी दोस्तों में से एक और मशहूर फिल्म प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी ने इस राज़ पर से पर्दा उठाया है।

पहलाज निहलानी, जिन्होंने गोविंदा के साथ 'आँखें' और 'शोला और शबनम' जैसी सुपरहिट फिल्में बनाईं, ने एक इंटरव्यू में कुछ ऐसी बातें कह दी हैं, जो गोविंदा के फैंस का दिल तोड़ सकती हैं।

'पार्टनर' की सफलता सिर चढ़कर बोली?

निहलानी के मुताबिक, गोविंदा के करियर के ताबूत में आखिरी कील साबित हुई साल 2007 में आई फिल्म 'पार्टनर'। इस फिल्म में गोविंदा ने सलमान खान के साथ मिलकर पर्दे पर वापसी का ऐसा धमाकेदार ऐलान किया था कि सबको लगा, 'राजा बाबू इज़ बैक!'

लेकिन निहलानी का दावा है कि यही सफलता गोविंदा पर भारी पड़ गई। उन्होंने कहा:
"पार्टनर के बाद, गोविंदा को ऐसा लगने लगा कि अब सलमान खान ही उनके करियर को दोबारा ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। वह पूरी तरह से सलमान पर निर्भर हो गए।"

"गोविंदा का रवैया बदल गया था"

निहलानी ने आरोप लगाया कि इस फिल्म की सफलता के बाद गोविंदा का व्यवहार पूरी तरह से बदल गया था।

  • अहंकार: उनमें अहंकार आ गया था और वह अपने पुराने दोस्तों और शुभचिंतकों की बातें सुनना बंद कर चुके थे।
  • गलत सलाहकारों से घिर गए: गोविंदा ऐसे लोगों से घिर गए थे जो सिर्फ उनकी तारीफ करते थे और उन्हें गलत सलाह देते थे। निहलानी ने कहा, "मैंने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसने मेरी एक नहीं सुनी।"

निहलानी का कहना है कि इसी रवैये के चलते गोविंदा ने कई अच्छी फिल्में ठुकरा दीं और धीरे-धीरे इंडस्ट्री से दूर होते चले गए। वह सलमान खान से उम्मीदें लगाए बैठे रहे, लेकिन बॉलीवुड किसी का इंतज़ार नहीं करता।

यह खुलासा हमें बॉलीवुड की उस कड़वी सच्चाई से रूबरू कराता है, जहाँ एक शुक्रवार आपकी दुनिया बना भी सकता है और बिगाड़ भी। पहलाज निहलानी के इन दावों ने गोविंदा के डूबते करियर की कहानी में एक नया और सनसनीखेज मोड़ ज़रूर ला दिया है।