ईरान के बाद अब किसकी बारी? अपनी साख बचाने के लिए ट्रंप ने चुना नया टारगेट, क्या दुनिया फिर महायुद्ध की कगार पर
News India Live, Digital Desk: दुनिया अभी ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष की आग से झुलस ही रही थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए खुलासे से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। ईरान में मची तबाही और वहां के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने के बाद, अब ट्रंप की नजरें एक नए लक्ष्य पर टिक गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अपनी घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'सख्त नेता' की छवि (Credibility) को फिर से स्थापित करने के लिए किसी बड़े ऑपरेशन की तैयारी में हैं। सूत्रों की मानें तो ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने घुटने नहीं टेके, तो अगला निशाना वो देश हो सकता है जो पर्दे के पीछे से तेहरान की मदद कर रहा है।
ईरान में 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी': 2000 ठिकानों को किया तबाह
अमेरिकी सेना ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान के परमाणु केंद्रों, मिसाइल साइटों और सुरक्षा मुख्यालयों पर अब तक की सबसे बड़ी बमबारी की है। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ईरान की सैन्य शक्ति को 'मिट्टी में मिला दिया' है। हालांकि, पेंटागन के अंदर से ही उठ रही विरोधाभासी आवाजों ने ट्रंप की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप ने बिना किसी ठोस सबूत के 'तत्काल खतरे' का हवाला देकर यह युद्ध थोपा है। अब अपनी इस गिरती साख को बचाने के लिए ट्रंप ने नया 'दुश्मन' खोज लिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और तेल की कीमतों में आग लगनी तय है।
कौन है ट्रंप का अगला निशाना? चीन और रूस को भी चेतावनी!
ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान साफ किया कि वे उन देशों को बख्शने के मूड में नहीं हैं जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से तेल खरीद रहे हैं या उसे हथियार सप्लाई कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप अब 'आर्थिक युद्ध' (Economic War) का दायरा बढ़ाकर उन देशों पर भारी टैरिफ (Tariffs) लगाने जा रहे हैं जो ईरान के साथ खड़े हैं। ट्रंप ने सीधे तौर पर 'होरमुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए अल्टीमेटम दिया है, और इसके पीछे बाधा बन रहे 'तीसरे पक्ष' को अपनी क्रॉसहेयर (निशाने) पर ले लिया है।
क्या फिर से होगा 'रेजीम चेंज' का खेल?
ट्रंप ने ईरानी जनता से अपील की है कि वे अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें। उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका अब केवल बमबारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह उन ताकतों को भी निशाना बनाएगा जो मिडिल ईस्ट में अमेरिकी हितों को चुनौती दे रही हैं। ईरान के नौसेना प्रमुख की मौत और परमाणु केंद्रों को हुए नुकसान के बाद अब ट्रंप की रणनीति 'सरकार बदलने' (Regime Change) की ओर मुड़ती दिख रही है। अगर ऐसा हुआ, तो इराक और अफगानिस्तान के बाद यह ट्रंप का सबसे बड़ा और जोखिम भरा राजनीतिक दांव होगा, जिसका असर भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ेगा।