Adhik Maas : अधिक मास में क्यों किया जाता है 33 मालपुओं का दान? जानें इसके पीछे का धार्मिक रहस्य और दान की सही विधि
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में 'अधिक मास' (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है) का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस पवित्र महीने में पूजा-पाठ, व्रत और दान का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। मलमास के दौरान 33 मालपुओं का दान करने की एक प्राचीन और विशेष परंपरा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दान के बिना अधिक मास की साधना अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं कि आखिर 33 की संख्या में ही मालपुए क्यों दान किए जाते हैं और इसका सही तरीका क्या है।
33 मालपुओं का ही दान क्यों? पौराणिक रहस्य
सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं की मान्यता है। अधिक मास के अधिपति भगवान विष्णु (श्री पुरुषोत्तम) हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अधिक मास के दौरान दान किए जाने वाले 33 मालपुए 33 कोटि (प्रकार) के देवताओं का प्रतीक माने जाते हैं। प्रत्येक मालपुआ एक विशिष्ट देवता को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दान के माध्यम से जातक सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त कर लेता है और उसके जीवन के समस्त पापों का नाश होता है।
मालपुआ दान करने का धार्मिक महत्व
ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में मालपुआ दान करने के पीछे कई गहरे कारण बताए गए हैं:
विष्णु कृपा: मालपुआ भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय भोग है। इसे दान करने से भगवान पुरुषोत्तम प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का वरदान देते हैं।
ग्रह दोषों से मुक्ति: मलमास में यह दान करने से कुंडली के अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है, विशेषकर बृहस्पति (गुरु) ग्रह मजबूत होता है।
अक्षय पुण्य: इस महीने में किया गया दान सीधे अक्षय पुण्य की श्रेणी में आता है, जिसका फल लोक और परलोक दोनों में मिलता है।
कैसे करें 33 मालपुओं का दान? (दान की सही विधि)
दान का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसे विधि-विधान से किया जाए। मालपुआ दान की प्रक्रिया इस प्रकार है:
शुद्धता का ध्यान: सबसे पहले शुद्ध घी में 33 मालपुए बनाएं। संभव हो तो इसमें गुड़ का प्रयोग करें।
कांसे का बर्तन: शास्त्रों के अनुसार, इन मालपुओं को कांसे के पात्र (बर्तन) में रखकर दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि संभव न हो तो सामर्थ्य अनुसार अन्य पात्र ले सकते हैं।
संकल्प और पूजन: दान से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करें और हाथ में जल लेकर दान का संकल्प लें।
दक्षिणा: मालपुओं के साथ कुछ दक्षिणा (पैसे) और संभव हो तो पीले वस्त्र भी रखें।
किसे दें दान: यह दान किसी योग्य ब्राह्मण को या मंदिर में देना चाहिए। दान करते समय "नमो नारायण" या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
अधिक मास में दान के अन्य नियम
मलमास के दौरान मालपुए के अलावा दीप दान, अन्न दान और वस्त्र दान का भी बड़ा महत्व है। इस पूरे महीने तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए और सात्विक जीवन शैली अपनानी चाहिए। 33 मालपुओं का दान आमतौर पर महीने के अंतिम दिनों में या पूर्णिमा की तिथि पर करना सबसे उत्तम माना जाता है।