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April 30 2026 08:33 pm

Bhaum Pradosh Vrat 2026 : कर्ज से मुक्ति दिलाएगा अप्रैल का आखिरी प्रदोष व्रत, मंगल दोष दूर करने के लिए जरूर करें ये उपाय

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News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, अप्रैल 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे 'भौम प्रदोष व्रत' कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम दिन है। विशेष रूप से जो लोग लंबे समय से कर्ज (कर्ज मुक्ति) के बोझ से दबे हैं या जिनकी कुंडली में मंगल दोष है, उनके लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं है।

कब है भौम प्रदोष व्रत? तिथि और शुभ मुहूर्त

अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत की तिथि को लेकर भक्तों में उत्साह है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार:

प्रदोष व्रत तिथि: 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार)

पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 06:45 से रात 08:55 तक (प्रदोष काल)

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 अप्रैल की सुबह से

शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के समय यानी 'प्रदोष काल' में ही की जाती है। इस समय शिव जी प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

कर्ज मुक्ति के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय

भौम प्रदोष के दिन मंगल ग्रह के प्रभाव को शांत करने और आर्थिक तंगी दूर करने के लिए निम्नलिखित उपाय कारगर माने जाते हैं:

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ: इस दिन शाम के समय हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर 'ऋणमोचन मंगल स्तोत्र' का पाठ करें। इससे कर्ज उतरने के रास्ते खुलते हैं।

शिवलिंग पर शहद का अभिषेक: भगवान शिव का शहद से अभिषेक करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। यह उपाय भूमि-भवन से जुड़े विवादों को सुलझाने में मदद करता है।

लाल वस्तुओं का दान: भौम प्रदोष पर लाल मसूर की दाल, लाल वस्त्र या गुड़ का दान करना शुभ माना जाता है। इससे मंगल ग्रह मजबूत होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

मंगल दोष और स्वास्थ्य लाभ

जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष (Manglik Dosha) है, उनके विवाह में आ रही अड़चनें इस व्रत को रखने से दूर हो सकती हैं। चूंकि मंगल का संबंध रक्त और ऊर्जा से है, इसलिए इस दिन व्रत रखने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, विशेषकर रक्त विकारों में सुधार होने की मान्यता है।

भौम प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें।

हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

पूरे दिन निराहार रहें या फलाहार का सेवन करें।

शाम को (प्रदोष काल में) शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल और दूध से अभिषेक करें।

बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल चढ़ाएं।

अंत में भौम प्रदोष व्रत की कथा सुनें और आरती करें।