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April 07 2026 10:50 pm

रिंग रोड मुआवजा घोटाले में कार्रवाई, JPSC के पूर्व परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार समेत 17 के खिलाफ ACB की चार्जशीट

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News India Live, Digital Desk: झारखंड के बहुचर्चित रिंग रोड भू-अर्जन घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अपना शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। सोमवार को एसीबी ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए जेपीएससी (JPSC) के पूर्व परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार और तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक समेत कुल 17 नामजद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल कर दिया है। इन सभी पर सरकारी पद का दुरुपयोग कर भू-माफियाओं और बिचौलियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये के सरकारी मुआवजे को डकारने का गंभीर आरोप है।

फर्जी कागजों पर मुआवजे की बंदरबांट: गरीबों और आदिवासियों का हक छीना

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि बलियापुर बाईपास से धनसार चौक तक बनने वाले रिंग रोड के लिए अधिग्रहित जमीन के मामले में भारी जालसाजी की गई। तत्कालीन सीओ विशाल कुमार और भू-अर्जन विभाग के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर फर्जी दस्तावेजों (डीड) के आधार पर मुआवजे का भुगतान कर दिया। असली रैयतों (जमीन मालिकों) को सूचना दिए बिना ही कागजों पर जमीन किसी और के नाम दिखाकर सरकारी धन निकाल लिया गया। इस खेल में बिचौलियों ने दलितों और आदिवासियों की जमीन को औने-पौने दाम पर खरीदा और फिर अधिकारियों से मिलकर भारी-भरकम मुआवजा उठा लिया।

एसीबी की छापेमारी और अब तक की कार्रवाई

यह घोटाला पहली बार 2015 में सामने आया था, जिसकी जांच की जिम्मेदारी 2016 में एसीबी को सौंपी गई थी। लंबे समय तक चली तफ्तीश के बाद एसीबी ने इस साल 9 जनवरी को रांची, बोकारो और देवघर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी कर इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में जेपीएससी के परीक्षा नियंत्रक पद पर तैनात विशाल कुमार उस समय धनबाद के सीओ थे। अदालत ने फरवरी में विशाल कुमार समेत कई आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद अब चार्जशीट दाखिल होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

चार्जशीट में इन 'बड़ों' के नाम शामिल

एसीबी द्वारा कोर्ट में सौंपी गई चार्जशीट में मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारियों और रसूखदारों के नाम शामिल हैं:

विशाल कुमार: तत्कालीन धनबाद सीओ (वर्तमान में जेपीएससी परीक्षा नियंत्रक)।

उदयकांत पाठक: तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी।

मिथिलेश कुमार: तत्कालीन कानूनगो।

रामकृपाल गोस्वामी: पैक्स चेयरमैन।

काली प्रसाद सिंह: भू-माफिया/बिचौलिया। इनके अलावा अमीन और अन्य राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ भी साक्ष्य पेश किए गए हैं, जिन्होंने बगैर किसी भौतिक सत्यापन या शिविर लगाए फर्जी रैयतों के नाम पर फाइलें आगे बढ़ाई थीं।

जमीन अभी भी असली रैयतों के पास, पैसा खा गए दलाल

एसीबी की जांच में यह भी पता चला है कि जिन जमीनों का मुआवजा कागजों पर दे दिया गया, उन पर आज भी पुराने और असली मालिक ही काबिज हैं। आरोपियों ने केवल कागजों पर फर्जी डीड तैयार की और मिलीभगत से सरकारी खजाने से पैसे निकाल लिए। विभागीय अधिकारियों ने मुआवजे की सूचना उन दलालों के साथ साझा की थी, जिन्होंने पहले ही रैयतों को भ्रमित कर रखा था। सरकार अब इन सभी दोषियों से मुआवजे की राशि वसूलने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।