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April 05 2026 12:40 pm

Aadhaar Card Update : अब आधार में सुधर सकेगी जन्मतिथि, पटना हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद UIDAI डायरेक्टर तलब

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News India Live, Digital Desk: अगर आपके आधार कार्ड में जन्मतिथि (Date of Birth) गलत है और आप उसे सुधारने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट कर थक चुके हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधारने के नियमों को लेकर पटना हाईकोर्ट ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल तकनीकी नियमों का हवाला देकर लोगों के जरूरी दस्तावेजों में सुधार को रोका नहीं जा सकता।

हाईकोर्ट ने UIDAI पटना के निदेशक को किया तलब

न्यायमूर्ति आरके चौधरी की एकलपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के क्षेत्रीय निदेशक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। मामला एक याचिकाकर्ता से जुड़ा है, जिसकी जन्मतिथि आधार कार्ड में गलत दर्ज हो गई थी और तकनीकी बाधाओं के कारण उसे सुधारा नहीं जा रहा था। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आधार जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज में त्रुटि के कारण किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों या उसकी सेवाओं में बाधा नहीं आनी चाहिए।

सिर्फ एक बार सुधार का नियम बनेगा आसान?

वर्तमान में UIDAI के नियमों के मुताबिक, आधार में जन्मतिथि को केवल एक बार ही अपडेट किया जा सकता है। अगर कोई दोबारा सुधार कराना चाहता है, तो उसे एक लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें क्षेत्रीय कार्यालय के चक्कर लगाने होते हैं। हाईकोर्ट की इस सक्रियता के बाद माना जा रहा है कि अब UIDAI को अपनी प्रक्रियाओं में लचीलापन लाना होगा, ताकि जेन्युइन मामलों में लोगों को परेशानी न हो।

आम जनता पर क्या होगा इसका असर

अदालत के इस हस्तक्षेप से बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर के उन लाखों लोगों को उम्मीद जगी है जो आधार में 'लिमिट क्रॉस' (Limit Cross) की समस्या से जूझ रहे हैं। अक्सर देखा गया है कि स्कूल सर्टिफिकेट या पैन कार्ड में अलग जन्मतिथि होने और आधार में अलग होने के कारण लोगों की पेंशन, सरकारी नौकरी और बैंक से जुड़े काम रुक जाते हैं। अब पटना हाईकोर्ट इस मामले में विस्तृत सुनवाई कर यह तय करेगा कि ऐसी स्थितियों में सुधार का सरल रास्ता क्या होना चाहिए।

अगली सुनवाई में होगा बड़ा फैसला

कोर्ट ने क्षेत्रीय निदेशक को निर्देश दिया है कि वे अगली तारीख पर उपस्थित होकर बताएं कि आधार सुधार की प्रक्रिया को आम आदमी के लिए सुलभ क्यों नहीं बनाया जा रहा है। क्या तकनीकी सॉफ्टवेयर किसी व्यक्ति के कानूनी दस्तावेजों से ऊपर हो सकता है? इन तमाम सवालों पर अब UIDAI को जवाब देना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने वाली है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।