शाहजहाँपुर में निकली लाट साहब की अनोखी बारात,भैंसा गाड़ी पर सवार साहब पर बरसे जूते-चप्पल

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News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में होली का त्यौहार पूरे देश से बिल्कुल अलग अंदाज में मनाया जाता है। यहाँ रंगों के साथ-साथ 'जूते और चप्पलों' की भी बारिश होती है। आज यानी 5 मार्च 2026 को शहर में ऐतिहासिक 'लाट साहब' का जुलूस निकाला गया, जिसे देखने के लिए भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच निकली इस बारात में परंपरा और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला।

भैंसा गाड़ी पर सवार 'साहब' और चप्पलों की मार

परंपरा के अनुसार, एक व्यक्ति को 'लाट साहब' बनाया जाता है, जिसे भैंसा गाड़ी पर बिठाकर पूरे शहर में घुमाया जाता है। जुलूस के दौरान लोग लाट साहब पर जूते और चप्पलों की बौछार करते हैं। यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन शाहजहाँपुर के निवासियों के लिए यह बुराई पर अच्छाई की जीत और अंग्रेजी हुकूमत के प्रति आक्रोश जताने का एक पारंपरिक तरीका है।

18वीं सदी से जुड़ा है इस परंपरा का इतिहास

इस अनोखी परंपरा की शुरुआत नवाबों के दौर में हुई थी। जानकारों के अनुसार, 18वीं शताब्दी में नवाब और बाद में ब्रिटिश हुकूमत के अधिकारियों के प्रति अपना विरोध दर्ज कराने के लिए स्थानीय लोगों ने यह तरीका अपनाया था। आजादी के बाद, यह एक लोक परंपरा बन गई जिसे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग मिलकर मनाते हैं। इसे 'बड़े लाट साहब' और 'छोटे लाट साहब' के नाम से दो अलग-अलग जुलूसों के रूप में निकाला जाता है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: अभेद्य किले में तब्दील हुआ शहर

जुलूस की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे शहर को हाई-अलर्ट पर रखा।

मस्जिदों को ढका गया: सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए जुलूस के रास्ते में पड़ने वाली मस्जिदों को तिरपाल से ढक दिया गया ताकि उन पर रंग न पड़े।

ड्रोन से निगरानी: चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़ पर नजर रखी गई।

रूट डायवर्जन: जुलूस के दौरान शहर के मुख्य मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रही।

होली के हुड़दंग में 'साहब' का स्वागत

जुलूस की शुरुआत फूलमती मंदिर से हुई, जहाँ लाट साहब को नहला-धुलाकर और हेलमेट पहनाकर तैयार किया गया (ताकि जूते लगने से चोट न आए)। इसके बाद जैसे ही बारात मुख्य बाजार में पहुँची, लोगों ने "होली है" के नारों के साथ जूतों की बारिश शुरू कर दी। यह जुलूस शहर के विभिन्न इलाकों से होता हुआ संपन्न हुआ।