बेरोजगारी को झटका और किसानों को तोहफा, योगी सरकार के इस 'फ्यूल' ने गाड़ियों के साथ-साथ विकास की रफ़्तार भी बढ़ा दी

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News India Live, Digital Desk : जब भी हम उत्तर प्रदेश और खेती की बात करते हैं, तो ज़ेहन में सबसे पहले लहलहाते गन्ने के खेत आते हैं। लेकिन अब कहानी थोड़ी बदल रही है। उत्तर प्रदेश सिर्फ चीनी का कटोरा नहीं रह गया है, बल्कि देश का 'पावर हाउस' बनने की ओर बढ़ चला है। हालिया रिपोर्ट्स और सरकार के आंकड़ों को देखें, तो इथेनॉल उत्पादन (Ethanol Production) में यूपी ने देशभर के तमाम राज्यों को पीछे छोड़ दिया है और नंबर वन का पायदान हासिल किया है।

इथेनॉल आखिर चर्चा में क्यों है?

आम आदमी की भाषा में कहें तो इथेनॉल एक तरह का ईधन (Fuel) है जिसे पेट्रोल में मिलाया जाता है। इससे पेट्रोल के दाम थोड़े कम होते हैं और प्रदूषण भी कम फैलता है। योगी सरकार की नई पॉलिसी ने इसी पर दांव लगाया है। पहले गन्ने के बाई-प्रोडक्ट (शीरे) का ज्यादा इस्तेमाल शराब बनाने या बेकार जाने में होता था, लेकिन अब सरकार इसे सीधे 'विकास' से जोड़ रही है।

किसानों के घर लौट रही है रौनक

यूपी के लाखों परिवारों की आजीविका गन्ने पर निर्भर है। सालों से किसानों की एक ही बड़ी शिकायत रहती थी—भुगतान में देरी। अब जब बड़े पैमाने पर इथेनॉल डिस्टिलरीज (फैक्ट्रियां) खुल रही हैं, तो गन्ने की मांग बढ़ गई है। इससे न केवल किसानों को समय पर पैसा मिल रहा है, बल्कि प्रति एकड़ उनकी आय में भी काफी सुधार हुआ है। कई किसान तो अब गन्ने की खेती को घाटे का नहीं, बल्कि फायदे का सौदा मानने लगे हैं।

रोजगार के नए मौके और बदलती तस्वीर

सबसे बड़ी खुशखबरी प्रदेश के युवाओं के लिए है। सिर्फ इथेनॉल की नई यूनिट्स खुलने से हजारों की संख्या में नौकरियां पैदा हो रही हैं। यह नौकरियां केवल मजदूरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टेक्निकल क्षेत्र, ट्रांसपोर्ट, और सप्लाई चेन में भी नए मौके खुल रहे हैं। जहाँ कभी लोग रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों का रुख करते थे, अब उनके ही ज़िलों में फैक्ट्रियां लग रही हैं।

क्या कहता है भविष्य का समीकरण?

यूपी का 'नंबर वन' बनना महज इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह उन सरकारी नीतियों का असर है जिसमें सिंगल विंडो क्लीयरेंस और निवेशकों को मिलने वाली सब्सिडी ने अहम भूमिका निभाई है। जैसे-जैसे देश में हाइब्रिड और फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे इथेनॉल की मांग आसमान छुएगी। इसका मतलब साफ़ है कि आने वाले सालों में यूपी देश के ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

आम जनता के लिए क्या है खास?

सोचिए, अगर आपका देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल के आयात पर कम निर्भर रहेगा, तो महंगाई पर लगाम लगाना आसान होगा। यही इस पूरी नीति का सार है। यूपी के गाँव अब आत्मनिर्भरता की राह पर हैं, जहाँ का किसान अब सिर्फ़ चीनी नहीं, बल्कि भारत को दौड़ने वाली ताकत दे रहा है।

कुल मिलाकर, 2025 का अंत उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी कामयाबी की खबर लेकर आया है, और अगर यही रफ्तार बनी रही, तो 2026 में यूपी की इकॉनमी के आंकड़े और भी चौंकाने वाले हो सकते हैं।