UP की बेटियों के हक में बड़ा फैसला, अब शादी के बाद भी पिता की खेती की जमीन पर मिलेगा बराबर का हिस्सा
UP Married Daughters Property Rights: उत्तर प्रदेश की लाखों-करोड़ों बेटियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत देने वाली खबर है। अब तक पिता की खेती की ज़मीन पर शादीशुदा बेटियों के अधिकार को लेकर जो एक कानूनी अड़चन और भ्रम की स्थिति थी, उसे सरकार ने खत्म कर दिया है। यह एक ऐसा फैसला है जो समाज में लड़कियों को और भी मज़बूत बनाएगा।
पहले क्या था नियम और क्या थी दिक्कत?
अब तक उत्तर प्रदेश में 'राजस्व संहिता 2006' नाम का एक कानून लागू था। इस कानून में एक नियम था जो पिता की खेती की ज़मीन के बंटवारे में बेटों और अविवाहित बेटियों को तो बराबरी का हक़ देता था, लेकिन शादीशुदा बेटियों को इस अधिकार से एक तरह से बाहर रखता था।
आसान भाषा में कहें तो, अगर किसी पिता की मृत्यु हो जाती थी, तो उनकी खेती की ज़मीन पर पहला हक उनके बेटों और कुंवारी बेटियों का होता था। शादीशुदा बेटी का नंबर बहुत बाद में आता था या कई मामलों में आता ही नहीं था। यह एक तरह का भेदभाव था जो कहीं न कहीं यह मानता था कि शादी के बाद बेटी का अपने मायके की ज़मीन पर कोई हक नहीं रहता।
अब क्या बदला है?
योगी सरकार ने इस पुराने नियम में एक बहुत ही ज़रूरी और ऐतिहासिक बदलाव किया है। कानून से "अविवाहित" शब्द को ही हटा दिया गया है।
इसका सीधा और साफ मतलब यह है कि अब बेटी चाहे शादीशुदा हो, विधवा हो, तलाकशुदा हो या अविवाहित, पिता की खेती की ज़मीन पर उसका उतना ही हक़ होगा, जितना उसके भाई यानी बेटे का होता है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि बेटी, बेटी होती है और शादी हो जाने से उसका अपने पिता की संपत्ति पर अधिकार खत्म नहीं होता।
यह फैसला सिर्फ ज़मीन के एक टुकड़े का नहीं, बल्कि सम्मान और बराबरी के हक़ का है। इससे न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मज़बूती मिलेगी, बल्कि समाज में उनकी स्थिति और भी बेहतर होगी। यह कदम सही मायनों में "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" के नारे को और सशक्त करता है।