8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की चांदी! बोनस, PF और ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाने की मांग; रिटायरमेंट पर मिलेगा मोटा पैसा
नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें अब परवान चढ़ने लगी हैं। वेतन वृद्धि के साथ-साथ अब कर्मचारी संगठनों ने बोनस, प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी (Gratuity) की मौजूदा सीमाओं (Seiling) में आमूलचूल बदलाव की मांग तेज कर दी है। संगठनों का तर्क है कि दशकों पुराने नियम और मौजूदा महंगाई के बीच कोई तालमेल नहीं रह गया है। यदि सरकार इन मांगों को स्वीकार करती है, तो न केवल कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी बढ़ेगी, बल्कि रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड भी दोगुना तक हो सकता है।
बोनस और पीएफ की पुरानी सीमाओं पर उठा सवाल
कर्मचारी संगठनों ने सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि बोनस की गणना के लिए अभी भी सालों पुराने ₹7,000 के आधार को माना जाता है। आज के समय में जब न्यूनतम वेतन ही इससे कहीं अधिक है, तो इस सीमित आधार पर बोनस मिलना कर्मचारियों के साथ नाइंसाफी है। इसी तरह, ईपीएफ (EPF) में ₹15,000 की अनिवार्य बेसिक सैलरी सीमा को भी खत्म करने की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि पीएफ का योगदान वास्तविक बेसिक और डीए (DA) पर आधारित होना चाहिए ताकि रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त कोष जमा हो सके।
ग्रेच्युटी सीमा: ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹40 लाख करने का प्रस्ताव
मौजूदा नियमों के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा ₹20 लाख तय है। लंबी सेवा देने वाले और उच्च वेतनमान वाले कर्मचारियों के लिए यह सीमा एक बड़ी बाधा बन गई है। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि:
ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹30-40 लाख किया जाए।
या फिर इस सीमा (Ceiling) को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए ताकि वास्तविक वेतन और सेवा वर्षों के आधार पर पूरा लाभ मिल सके।
[Image showing comparison of current vs proposed Gratuity and PF limits]
क्यों जरूरी है इन नियमों में बदलाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, 7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद से कर्मचारियों की सैलरी में काफी सुधार हुआ है, लेकिन सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट लाभों से जुड़ी सीमाएं अभी भी पुराने ढांचे पर टिकी हैं।
महंगाई का असर: 10-15 साल पहले की तुलना में जीवन यापन की लागत कई गुना बढ़ चुकी है।
वेतन विसंगति: ऊंची सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को पीएफ और ग्रेच्युटी का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है क्योंकि उनकी गणना एक तय सीमा पर आकर रुक जाती है।
रिटायरमेंट प्लानिंग: सीमाओं में विस्तार से कर्मचारियों को भविष्य की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
सरकार का रुख: खर्च और संतुलन की चुनौती
हालांकि कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें औपचारिक रूप से सरकार तक पहुंचा दी हैं, लेकिन वित्त मंत्रालय ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को नियंत्रित करना है। माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में इन मांगों को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जा सकता है।