झारखंड में 56 घंटे में 6 मौतें रामगढ़ में हाथियों ने फिर ली 2 लोगों की जान, आखिर कब रुकेगा यह सिलसिला?

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News India Live, Digital Desk : झारखंड, जहाँ हरे-भरे जंगल और वन्यजीव बहुतायत में हैं, वहाँ से एक बहुत ही दुखद और चिंताजनक खबर सामने आई है। इन दिनों हाथियों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि महज 56 घंटे के भीतर 6 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है! और अभी यह सिलसिला थम नहीं रहा है। रामगढ़ (Ramgarh) जिले से तो और भी बुरी खबर है, जहाँ हाथियों ने 2 और लोगों की जान ले ली है, जिससे ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश का माहौल है। आखिर क्यों और कब तक इंसानों और हाथियों के बीच यह खूनी संघर्ष (khooni sangharsh) चलता रहेगा?

हाथियों के हमलों से सहमा झारखंड

जानकारी के मुताबिक, झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में हाथियों के झुंड अपनी सीमाएं पार कर इंसानी बस्तियों में घुस रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे जंगलों का कटना (jungle katna), हाथियों के प्राकृतिक पर्यावास (natural habitat) में कमी आना, और भोजन-पानी की तलाश में उनका भटकना। लेकिन इन सबका नतीजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। बीते कुछ घंटों में हुई 6 मौतों ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है, और इसके ठीक बाद रामगढ़ जिले से आई दो और मौतें (2 more deaths) बताती हैं कि स्थिति कितनी गंभीर है।

ग्रामीण (villagers) अब घरों से निकलने में डर रहे हैं, क्योंकि कब कौन-हाथी रास्ते में आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। किसानों (farmers) की फसलें (crops) बर्बाद हो रही हैं और लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। सरकार और वन विभाग (Forest Department) के सामने यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि इंसानों और हाथियों के बीच एक सुरक्षित सह-अस्तित्व (safe coexistence) कैसे स्थापित किया जाए।

सुरक्षा और समाधान की ज़रूरत

ग्रामीण इलाकों में अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि हाथियों के लगातार हो रहे इन हमलों से बचने के लिए क्या इंतज़ाम किए जा रहे हैं। क्या वन विभाग इन हाथियों को वापस जंगल में भेजने या आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए कोई ठोस योजना बना रहा है? यह भी देखना ज़रूरी है कि हाथियों के लिए उनके प्राकृतिक पर्यावास में भोजन और पानी की उचित व्यवस्था हो ताकि वे बस्तियों की ओर न आएं।

फिलहाल तो, झारखंड के इन इलाकों में डर और मायूसी का माहौल है। लोगों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है और वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही कोई प्रभावी समाधान निकालकर इस गंभीर समस्या से राहत दिलाएगी और इंसानों तथा वन्यजीवों के बीच के इस दुखद संघर्ष को रोकेगी।