मदरसे के टॉयलेट में बंद मिलीं 40 लड़कियां, सरकारी टीम पहुंची तो खुला बड़ा राज़
आज हम आपको उत्तर प्रदेश के बहराइच से आई एक ऐसी खबर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर हमारे समाज में हो क्या रहा है। ये कोई मामूली घटना नहीं है, ये हमारे बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा से जुड़ा एक बहुत गंभीर मामला है।
हुआ कुछ यूं कि बहराइच में बाल कल्याण समिति और पुलिस की एक टीम मदरसों का रूटीन दौरा कर रही थी। इसी दौरान, जब टीम एक मदरसे के अंदर जांच के लिए पहुंची तो उन्हें कुछ गड़बड़ महसूस हुई। मदरसा चलाने वाले लोग टीम को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों को शक हो गया। जब टीम ने मदरसे का कोना-कोना छानना शुरू किया, तो उनकी नज़र एक टॉयलेट पर पड़ी जो बाहर से बंद था।
अधिकारियों ने जब उस टॉयलेट का दरवाज़ा खुलवाया, तो अंदर जो नज़ारा था, उसे देखकर वहां मौजूद हर कोई सन्न रह गया। उस छोटे से टॉयलेट के अंदर एक-दो नहीं, बल्कि पूरी 40 मासूम बच्चियां बंद थीं। बच्चियां बेहद डरी और सहमी हुई थीं। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उन्हें जबरदस्ती वहां छिपाया हो।
क्यों छिपाया गया था बच्चियों को?
अब सवाल ये उठता है कि आखिर इन बच्चियों को इस तरह टॉयlet में बंद करने की ज़रूरत क्यों पड़ी? शुरुआती जांच में जो बात सामने आ रही है, वो और भी चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि यह मदरसा गैर-कानूनी तरीके से चल रहा था और उसके पास कोई मान्यता नहीं थी। जब मदरसा चलाने वालों को पता चला कि सरकारी टीम जांच के लिए आ रही है, तो उन्होंने मदरसे में पढ़ने वाली बच्चियों की सही संख्या छिपाने के लिए उन्हें टॉयलेट में बंद कर दिया। उन्हें लगा कि ऐसा करके वो अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक देंगे, लेकिन उनकी ये चालाकी पकड़ी गई।
इस घटना के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मदरसा चलाने वाले मैनेजर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। जिन बच्चियों को वहां से निकाला गया है, उन्हें बाल कल्याण समिति अपनी देखरेख में रखकर उनके परिवार वालों से संपर्क कर रही है।
ये घटना उन हजारों गैर-कानूनी मदरसों और संस्थानों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है, जो बिना किसी नियम-कानून के चल रहे हैं। आखिर इन जगहों पर हमारे बच्चों का भविष्य कितना सुरक्षित है?