"25 किलोमीटर... और मेरी पूरी दुनिया जाम में फंसी थी" - बेंगलुरु के ट्रैफिक ने कैसे एक इंटरव्यू को मजाक बना दिया

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बेंगलुरु... भारत का 'सिलिकॉन वैली', लाखों युवाओं के सपनों का शहर। यहां की ऊंची तनख्वाह वाली नौकरियां और शानदार मौसम हर किसी को अपनी ओर खींचता है। लेकिन, इस शहर का एक और चेहरा भी है, एक ऐसा डरावना सच जिससे यहां रहने वाला हर शख्स रोज लड़ता है - और वो है यहां का जानलेवा ट्रैफिक जाम

यह ट्रैफिक सिर्फ आपका समय बर्बाद नहीं करता, बल्कि कभी-कभी यह आपके सपनों, आपके करियर और आपके आत्मविश्वास को भी कुचल देता है। ऐसी ही एक दिल तोड़ने वाली और अंदर तक झकझोर देने वाली कहानी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने दुनिया के साथ साझा की है, जिसकी नौकरी का एक बड़ा मौका इसी ट्रैफिक की भेंट चढ़ गया।

जब इंटरव्यू से बड़ी लड़ाई ट्रैफिक से बन गई

इस टेकी की कहानी किसी बुरे सपने जैसी है। उसे अपनी ड्रीम जॉब के लिए एक फेस-टू-फेस इंटरव्यू के लिए जाना था। इंटरव्यू का लोकेशन उसके घर से सिर्फ 25 किलोमीटर दूर था। दिल्ली या मुंबई जैसे शहरों के हिसाब से यह कोई बहुत बड़ी दूरी नहीं है। लेकिन, बेंगलुरु में यह 25 किलोमीटर का सफर उसके लिए एक सजा बन गया।

  • सड़कों पर गाड़ियों का समंदर: जैसे ही वह घर से निकला, उसका सामना गाड़ियों के एक ऐसे समंदर से हुआ जो इंच-इंच भर सरक रहा था। गूगल मैप्स पर लाल रंग की लकीरें उसका मजाक उड़ा रही थीं।
  • घंटों का इंतजार: मिनट घंटों में बदल गए, और वह अपनी गाड़ी में बस बेबसी से इंतजार करता रहा। हर गुजरते पल के साथ उसकी उम्मीदें टूट रही थीं और इंटरव्यू में पहुंचने की संभावना खत्म होती जा रही थी।
  • इंटरव्यू जो एक मजाक बन गया: आखिरकार, जब वह हांफता-कांपता, घंटों की देरी से इंटरव्यू लोकेशन पर पहुंचा, तो शायद वहां का माहौल ही बदल चुका था। एक ऐसा मौका जिसके लिए उसने महीनों तैयारी की थी, वह ट्रैफिक की वजह से शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया था। उस टेकी ने अपने दर्द को बयां करते हुए कहा कि यह इंटरव्यू उसके लिए "एक मजाक" बनकर रह गया।

यह सिर्फ एक इंसान की कहानी नहीं है, बल्कि यह बेंगलुरु में रहने वाले हर उस व्यक्ति की कहानी है जो रोज अपनी जिंदगी के कीमती घंटे ट्रैफिक जाम में बर्बाद कर देता है। यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सपनों का शहर बनाते-बनाते, रहने लायक शहर बनाना ही भूल गए हैं?