19 February 2026 : एक ऐतिहासिक संयोग हिंदू-मुस्लिम एकता और आस्था का सबसे बड़ा संगम

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News India Live, Digital Desk: साल 2026 की 19 फरवरी की तारीख इतिहास के पन्नों में एक बेहद खास और पवित्र दिन के रूप में दर्ज होने जा रही है। यह वह दिन है जब भारत के अलग-अलग समुदायों की आस्थाएं, त्योहार और महापुरुषों की जयंतियां एक ही धागे में पिरोई नजर आएंगी। ज्योतिषीय पंचांग और इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, इस दिन एक नहीं बल्कि चार बड़े कारण हैं, जो इसे पूरे देश के लिए उत्सव का दिन बना रहे हैं।

1. फुलेरा दूज: अबूझ मुहूर्त और प्रेम का उत्सव

हिंदू पंचांग के अनुसार, 19 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, जिसे 'फुलेरा दूज' के नाम से जाना जाता है। इसे साल के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है।

महत्व: मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने राधा रानी के साथ फूलों की होली खेली थी। ब्रज के मंदिरों में इस दिन से ही होली की शुरुआत हो जाती है।

अबूझ मुहूर्त: इस दिन को विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, यानी बिना किसी पंडित से पूछे आप कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं।

2. छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती (शिव जयंती)

इसी दिन पूरा देश मराठा साम्राज्य के संस्थापक और अदम्य साहस के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाएगा।

इतिहास: 19 फरवरी, 1630 को शिवनेरी दुर्ग में जन्मे शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की नींव रखी थी। महाराष्ट्र समेत पूरे देश में इस दिन भव्य जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

3. स्वामी रामकृष्ण परमहंस जयंती

19 फरवरी 2026 को महान आध्यात्मिक गुरु और स्वामी विवेकानंद के मार्गदर्शक श्री रामकृष्ण परमहंस की 190वीं जयंती भी मनाई जाएगी।

संदेश: उन्होंने दुनिया को सभी धर्मों की एकता और मानवता की सेवा का संदेश दिया। बेलूर मठ और दुनिया भर के रामकृष्ण मिशन केंद्रों पर इस दिन विशेष पूजा और ध्यान कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

4. रमजान 2026 की आहट: इबादत का महीना

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 में रमजान का पवित्र महीना भी इसी तारीख के आसपास शुरू होने की संभावना है। चांद के दीदार के आधार पर, 18 या 19 फरवरी से मुस्लिम समुदाय का पवित्र महीना शुरू होगा और पहला रोजा रखा जाएगा। यह समय आत्म-संयम, इबादत और भाईचारे का प्रतीक है।

एक ही दिन, अनेक उत्सव: क्या है इसके पीछे का संदेश?

19 फरवरी 2026 का यह संयोग भारत की 'विविधता में एकता' की सबसे सुंदर तस्वीर पेश करता है। एक ओर जहां मंदिरों में फूलों की होली होगी, वहीं दूसरी ओर मस्जिदों में रमजान की रौनक दिखेगी। साथ ही, शिवाजी महाराज और रामकृष्ण परमहंस जैसे महापुरुषों का स्मरण हमें वीरता और आध्यात्मिकता की याद दिलाएगा।