बांग्लादेश के 1.25 करोड़ हिंदू खुद को अकेला न समझें ,मोहन भागवत का बड़ा बयान

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News India Live, Digital Desk: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी संगठित हिंसा और मब लिंचिंग की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वहां का अल्पसंख्यक समाज अपने अधिकारों के लिए दृढ़ता से खड़ा होता है, तो उन्हें भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के हिंदुओं का साथ मिलेगा।

संबोधन की 5 बड़ी बातें (Key Takeaways)

'लड़ने' का फैसला और वैश्विक समर्थन: भागवत ने कहा, "बांग्लादेश में लगभग 1.25 करोड़ हिंदू हैं। अगर वे वहां रुकने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने का फैसला करते हैं, तो दुनिया भर के सभी हिंदू उनकी मदद के लिए आगे आएंगे।"

संगठन ही सुरक्षा है: उन्होंने समाज को संगठित होने की नसीहत देते हुए कहा कि कमजोर रहने से अत्याचार बढ़ता है। जब समाज एकजुट होकर खड़ा होता है, तभी वैश्विक शक्तियां और अंतरराष्ट्रीय समुदाय संज्ञान लेते हैं।

घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन: घरेलू मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठ और मतांतरण के कारण जनसंख्या असंतुलन बढ़ा है। उन्होंने नागरिकों से 'सतर्क' रहने और संदिग्धों की सूचना पुलिस को देने की अपील की।

भारत सरकार की भूमिका: उन्होंने संकेत दिया कि सरकार अब इन मुद्दों पर कार्रवाई कर रही है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे।

अखंड भारत का संकल्प: भागवत ने कहा कि 1947 वाली स्थिति अब नहीं है। भारत अब बहुत आगे बढ़ चुका है और जो भारत को तोड़ने की कोशिश करेंगे, वे खुद टूट जाएंगे।

बांग्लादेश संकट का संदर्भ

अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा में तेजी आई है। कट्टरपंथी तत्वों द्वारा हिंदू व्यवसायों, मंदिरों और छात्रों को निशाना बनाया गया है। भागवत का यह बयान उन हिंदुओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है जो पलायन के बजाय अपनी जन्मभूमि पर टिके रहने का संघर्ष कर रहे हैं।