सरहद पर तनाव पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई में खोस्त और पक्तिका बने निशाना, मासूमों की जान गई
News India Live, Digital Desk: अक्सर कहा जाता है कि पड़ोसी मुल्क का असर घर के आंगन तक पड़ता है, और अभी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जो हो रहा है, वह कुछ ऐसा ही है। हाल ही में पाकिस्तान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई ने सरहद पर तनाव का माहौल इतना गर्म कर दिया है कि हर कोई चिंतित है। बात सिर्फ फौजी कार्रवाई की होती तो शायद इतना शोर न मचता, लेकिन दिल दहला देने वाली बात यह है कि इस हमले में उन बेगुनाहों की जान गई है जिनका इस सियासी लड़ाई से कोई वास्ता नहीं था।
आखिर हुआ क्या था खोस्त और पक्तिका में?
मामला कुछ यूं है कि पाकिस्तान ने अचानक अफगानिस्तान के अंदरूनी इलाकों—खासकर खोस्त और पक्तिका प्रांत—को निशाना बनाया। खबरों के मुताबिक, यह हवाई हमले (Airstrikes) थे। पाकिस्तान का तर्क है कि वह वहां छिपे बैठे आतंकियों को निशाना बना रहा था, जिन्हें वह अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। लेकिन जमीनी हकीकत ने सबको झकझोर कर रख दिया।
वहां के स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, इन हमलों की चपेट में आम नागरिकों के घर आ गए। सोचिए, आधी रात का वक्त हो, परिवार सो रहा हो और अचानक आसमान से आफत बरस पड़े। बताया जा रहा है कि इसमें कई मासूमों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। यही वो वजह है जिससे यह मुद्दा अब सिर्फ एक 'बॉर्डर इश्यू' नहीं, बल्कि एक मानवीय त्रासदी (Human Tragedy) बन गया है।
तालिबान का गुस्सा और बिगड़ते रिश्ते
अफगानिस्तान में बैठी तालिबान सरकार इस घटना के बाद बेहद गुस्से में है। उनका कहना है कि पाकिस्तान का यह हमला उनकी संप्रभुता (sovereignty) पर सीधा वार है। जो देश कभी एक-दूसरे का समर्थन करने की बातें करते थे, आज एक-दूसरे पर बंदूकों का निशाना साध रहे हैं। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस तरह खुलेआम हवाई हमला करना और उसमें आम नागरिकों का मारा जाना, मामले को बहुत नाजुक मोड़ पर ले आया है।
आम आदमी पिस रहा है सियासत में
Google या सोशल मीडिया पर जब आप पाकिस्तान एयरस्ट्राइक टुडे न्यूज़ सर्च करते हैं, तो आपको आंकड़े मिलते हैं, लेकिन उन आंकड़ों के पीछे की चीखें अक्सर दब जाती हैं। चाहे वो पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाके के लोग हों या अफगानिस्तान के पक्तिका के निवासी, डर का माहौल दोनों तरफ है। एक आम इंसान बस शांति चाहता है, लेकिन सरहद पार से होती गोलाबारी और जवाबी कार्रवाई में सबसे ज्यादा नुकसान उसी का होता है।
अभी देखना यह होगा कि क्या दोनों देश बातचीत से इस तनाव और सीमा विवाद को सुलझा पाएंगे, या फिर यह चिंगारी एक बड़ी आग का रूप ले लेगी। फिलहाल, खोस्त और पक्तिका के उन परिवारों के लिए वक्त बहुत मुश्किल है जिन्होंने अपनों को खोया है।