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March 27 2026 09:52 am

1 April से बदल जाएगी आपकी सैलरी नए नियम और Income Tax के बड़े बदलाव, जानें आपकी इन-हैंड सैलरी

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News India Live, Digital Desk : 1 अप्रैल 2026 से नए वित्त वर्ष का आगाज होने जा रहा है और इसके साथ ही देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। भारत सरकार द्वारा सैलरी स्ट्रक्चर (Salary Structure) और इनकम टैक्स नियमों में किए गए हालिया बदलावों के चलते आपकी अगले महीने की सैलरी स्लिप बदली-बदली नजर आ सकती है। जहां कुछ कर्मचारियों की 'इन-हैंड' सैलरी में मामूली कटौती हो सकती है, वहीं कुछ को टैक्स सेविंग के नए विकल्प राहत देंगे। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या बदलने वाला है और इसका आपकी बचत पर क्या असर होगा।

सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव, बेसिक पे का नया गणित नए लेबर कोड और ईपीएफओ (EPFO) के संशोधित नियमों के तहत, अब कंपनियों को कर्मचारी की कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा 'बेसिक सैलरी' (Basic Pay) के रूप में रखना होगा। अब तक कई कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखकर अलाउंस (Allowances) ज्यादा देती थीं, जिससे पीएफ (PF) योगदान कम रहता था। अब बेसिक पे बढ़ने से आपका पीएफ और ग्रेच्युटी योगदान बढ़ जाएगा। इसका मतलब है कि भविष्य के लिए आपकी बचत तो ज्यादा होगी, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली (Take Home Salary) रकम थोड़ी कम हो सकती है।

इनकम टैक्स स्लैब और नई व्यवस्था का प्रभाव वित्त मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, 1 अप्रैल से 'न्यू टैक्स रिजीम' (New Tax Regime) को और अधिक आकर्षक बनाया गया है। अब 7 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा, बशर्ते आपने नई व्यवस्था चुनी हो। इसके अलावा, स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) का लाभ भी अब नई टैक्स व्यवस्था में शामिल कर दिया गया है। जो लोग अब तक पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में थे, उनके लिए यह आकलन करने का सही समय है कि क्या उन्हें स्विच करना चाहिए, क्योंकि डिफॉल्ट रूप से अब नई व्यवस्था ही लागू होगी।

HRA और अन्य अलाउंस पर सख्ती इनकम टैक्स विभाग अब हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के दावों को लेकर अधिक सतर्क हो गया है। अगर आप किराए के मकान में रहते हैं और 1 लाख रुपये से अधिक सालाना किराया देते हैं, तो मकान मालिक का पैन (PAN) देना अनिवार्य होगा। साथ ही, अब कई अन्य भत्तों (Perquisites) के मूल्यांकन के नियमों में भी बदलाव किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप फर्जी रेंट रसीद के जरिए टैक्स बचाते थे, तो अब ऐसा करना आपके लिए भारी पड़ सकता है।

कैसे करें अपने बजट की प्लानिंग? 1 अप्रैल से होने वाले इन बदलावों को देखते हुए विशेषज्ञों की सलाह है कि कर्मचारी अपनी नई सैलरी स्लिप का बारीकी से अध्ययन करें। यदि आपका पीएफ योगदान बढ़ रहा है, तो उसे एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखें। साथ ही, टैक्स बचाने के लिए 80C और अन्य धाराओं के तहत निवेश करने के बजाय नई टैक्स व्यवस्था के फायदों पर गौर करें, क्योंकि इसमें निवेश किए बिना भी कम टैक्स का लाभ मिलता है। कंपनियों ने भी अपने पेरोल सॉफ्टवेयर को अपडेट करना शुरू कर दिया है ताकि नए नियमों के तहत सैलरी प्रोसेस की जा सके।