आपका माउस बन गया जासूस, कंप्यूटर का माउस सुन रहा है आपकी निजी बातें, ऐसे करें तुरंत बचाव

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News India Live, Digital Desk: आपकी गोपनीयता (Privacy) और सुरक्षा पर खतरा सिर्फ आपके स्मार्टफोन या कैमरे से नहीं, बल्कि आपके सबसे भरोसेमंद साथी – कंप्यूटर माउस – से भी आ सकता है! यह सुनकर भले ही आपको अजीब लगे, लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने हाल ही में एक ऐसी चौंकाने वाली तकनीक का खुलासा किया है, जिससे आपके साधारण कंप्यूटर माउस का इस्तेमाल आपकी निजी बातचीत को सुनने और आपकी जासूसी करने के लिए किया जा सकता है. यह 'नया खतरा' डिजिटल दुनिया में गोपनीयता पर एक गंभीर सवाल उठा रहा है.

कैसे काम करती है यह जासूसी तकनीक?

यह तकनीक 'साइबर-अकॉस्टिक' हमलों पर आधारित है. इसमें होता यूँ है:

  1. लेजर का उपयोग: हैकर्स, दूर से आपके ऑप्टिकल माउस पर लेजर किरणें फेंकते हैं. ये माउस आमतौर पर नीचे एक लाल या इन्फ्रारेड लाइट का उपयोग करके सतह पर हलचल का पता लगाते हैं.
  2. माउस की संवेदनशीलता: माउस के अंदर लगा सेंसर लेजर की किरणों को रिसीव करता है. जब आप बोलते हैं, तो हवा में पैदा हुई ध्वनि तरंगें (sound waves) माउस और उसकी सतह पर हल्का कंपन पैदा करती हैं.
  3. ध्वनि का विश्लेषण: यह कंपन लेजर बीम को सूक्ष्म रूप से बदल देता है. हैकर्स फिर इन परिवर्तित लेजर किरणों को वापस प्राप्त करते हैं और 'सिग्नल प्रोसेसिंग' तकनीक का उपयोग करके इस कंपन से आपकी बातचीत को 'री-क्रिएट' (पुनर्निर्मित) कर सकते हैं.
  4. वायर्ड या वायरलेस: यह तकनीक वायर्ड और वायरलेस दोनों तरह के ऑप्टिकल माउस पर काम कर सकती है, हालांकि वायरलेस माउस को निशाना बनाना शायद थोड़ा आसान हो.

आपके माउस से प्राइवेसी पर खतरा क्यों?

यह हमला चुपचाप होता है, क्योंकि इसमें कोई सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होती. आपका माउस ही एक 'माइक्रोफोन' की तरह काम करता है, जिसे हैकर्स दूर बैठे संचालित कर सकते हैं.

तो, अपनी प्राइवेसी कैसे बचाएं? जानें 3 तुरंत उपाय!

इस तरह के साइबर-अकॉस्टिक हमले से खुद को बचाने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं:

  1. कमरे को 'साउंडप्रूफ' करें:
    • जिस कमरे में आपकी संवेदनशील बातचीत होती है, उसे जितना हो सके साउंडप्रूफ बनाने की कोशिश करें. दीवारों पर सॉफ्ट मेटेरियल (जैसे कपड़े, पर्दे, किताबें) लगाने से ध्वनि तरंगें कम प्रतिध्वनित होती हैं.
    • अगर संभव हो, तो बातचीत के दौरान तेज बैकग्राउंड नॉइज़ (जैसे हल्का संगीत) चलाएं ताकि ध्वनि सिग्नल कमजोर हो सकें.
  2. माइक्रोफोन का इस्तेमाल करें, न कि सिर्फ कमरा:
    • जब आप कोई कॉन्फिडेंशियल मीटिंग या बातचीत कर रहे हों, तो हाई-क्वालिटी हेडफोन और एक डेडीकेटेड माइक्रोफोन (जैसे हेडसेट) का उपयोग करें. इससे आपकी आवाज़ सीधे माइक्रोफोन में जाएगी और कमरे की गूँज या माउस का कंपन कम हो जाएगा.
    • माउस को सीधे अपनी आवाज़ के सामने रखने से बचें.
  3. ऑप्टिकल माउस को ढंक कर रखें / अलग तरह का माउस इस्तेमाल करें:
    • अगर आपको इस हमले की आशंका है, तो अपनी निजी बातचीत के दौरान माउस को किसी कपड़े से ढक दें या किसी ऐसी जगह पर रखें जहाँ सीधी लेजर बीम उस तक न पहुंच पाए.
    • मैकेनिकल या बॉल माउस (अगर आपको ऐसे पुराने माउस मिल पाएं) में इस तरह के ऑप्टिकल सेंसर नहीं होते, इसलिए वे इन हमलों के लिए प्रतिरोधी हो सकते हैं.

यह समस्या भले ही अभी बहुत बड़े पैमाने पर न हो, लेकिन भविष्य में ऐसे हमलों की संभावना को देखते हुए यह जानकारी होना बेहद ज़रूरी है. अपनी डिजिटल दुनिया में हमेशा सतर्क और सुरक्षित रहें!