सड़क हादसे में घायलों की मदद करने पर मिलेंगे ₹25,000, जानें क्या है सरकार की राह-वीर योजना

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News India Live, Digital Desk : सड़क दुर्घटना के समय अक्सर लोग पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी झंझटों के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं। इसी डर को दूर करने और कीमती जान बचाने के लिए सरकार ने एक शानदार पहल की है। केंद्र सरकार की 'राह-वीर' (Rah-Veer) योजना को अब दिल्ली समेत कई राज्यों में लागू किया जा रहा है, जिसके तहत नेक काम करने वालों को भारी इनाम दिया जाएगा।

क्या है 'राह-वीर' योजना?

राह-वीर योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करना है। इस योजना के तहत, यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुँचाता है, तो सरकार उसे ₹25,000 की नकद प्रोत्साहन राशि और एक प्रशस्ति पत्र (Certificate of Appreciation) प्रदान करेगी।

'गोल्डन ऑवर' का महत्व

हादसे के बाद का पहला एक घंटा (Golden Hour) किसी भी घायल के लिए जीवन और मृत्यु के बीच की कड़ी होता है।

अगर इस एक घंटे के भीतर मरीज को सही इलाज मिल जाए, तो बचने की संभावना 80% तक बढ़ जाती है।

'राह-वीर' योजना इसी समय में मदद करने वाले 'गुड सेमेरिटन' (Good Samaritan) को प्रोत्साहित करती है।

किसे और कैसे मिलेंगे ₹25,000?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ नियम तय किए गए हैं:

मददगार की भूमिका: व्यक्ति ने घायल को तुरंत अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुँचाया हो।

पुरस्कार की सीमा: यदि एक ही हादसे में एक से अधिक लोगों की जान बचाई गई है, तब भी प्रति घटना अधिकतम ₹25,000 का पुरस्कार दिया जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान: देश भर से चुने गए 10 सबसे बेहतरीन 'राह-वीरों' को सालाना ₹1 लाख का विशेष राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिलेगा।

पुलिस और कानून का डर अब खत्म!

सरकार ने साफ किया है कि मदद करने वाले नागरिकों को किसी भी तरह की कानूनी परेशानी नहीं होगी:

कानूनी सुरक्षा: मदद करने वाले व्यक्ति को पुलिस थाने या कोर्ट के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।

गोपनीयता: यदि मददगार अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहता, तो पुलिस उस पर दबाव नहीं डालेगी।

बिना भेदभाव: यह योजना सभी धर्म, जाति और वर्ग के लोगों के लिए समान रूप से लागू है।

पैसे पाने की प्रक्रिया क्या है?

जिला स्तर पर एक मूल्यांकन समिति (Evaluation Committee) बनाई गई है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट (DM), वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) शामिल होंगे। अस्पताल या पुलिस द्वारा जानकारी मिलने पर समिति मामले की जांच करेगी और इनाम की राशि सीधे मददगार के बैंक खाते (Direct Benefit Transfer) में भेज दी जाएगी।