योगी सरकार ने खत्म किया जमीनी विवाद का सबसे बड़ा कारण, अब नहीं होगी रत्ती भर भी हेराफेरी

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News India Live, Digital Desk: अगर आप गांव से ताल्लुक रखते हैं, तो एक दर्द आप बखूबी समझते होंगे—चकबंदी (Chakbandi) का दर्द। गांव-देहात में कहा जाता है कि जब चकबंदी आती है, तो आधी से ज्यादा रंजिशें और मुदकमेबाजी अपने आप शुरू हो जाती है। कहीं लेखपाल ने नाप में गड़बड़ी कर दी, तो कहीं अच्छी जमीन के बदले खराब जमीन थमा दी गई।

लेकिन अब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने इस पुरानी समस्या का परमानेंट इलाज निकाल लिया है। सरकार ने चकबंदी की प्रक्रिया में एक ऐसा ऐतिहासिक बदलाव किया है, जिससे अब जमीनी नाप-जोख में होने वाली 'धांधली' (Rigging) पूरी तरह बंद हो जाएगी।

आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि नया नियम क्या है और इससे आपको कैसे फायदा होगा।

क्या था पुराना 'मिंजुमला' का खेल?

अब तक जमीनों के कागजों में एक बड़ा सिरदर्द था मिंजुमला' (Minjumla) नंबर। साधारण भाषा में कहें तो, यह वो जमीन होती थी जिसका कागज पर तो हिस्सा तय होता था, लेकिन जमीन पर (On-ground) उसकी कोई पक्की चौहद्दी या नक्शा तय नहीं होता था।

इसी 'कन्फ्यूजन' का फायदा उठाकर अक्सर दबंग या भ्रष्ट कर्मचारी, किसानों की जमीन इधर से उधर कर देते थे। यानी कागज में आपकी जमीन कहीं और है और मौके पर आपको कब्जा कहीं और मिल रहा है। इससे नाप में गड़बड़ी होती थी और मुकदमे चलते थे।

योगी सरकार ने क्या बदल दिया?

अब सरकार ने साफ कर दिया है कि चकबंदी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले हर गाटा (Gata) का सही-सही भौतिक सत्यापन (Physical Verification) होगा।

नए आदेश के मुताबिक:

  1. गाटे का असली रकबा: अब चकबंदी तब तक आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक गाटे के हर हिस्सेदार का रकबा और हिस्सा बिल्कुल साफ-साफ अलग नहीं कर दिया जाता।
  2. मिंजुमला का खात्मा: जिन गाटों में मिंजुमला नंबर की समस्या थी, उनका पहले 'भौतिक विभाजन' किया जाएगा। यानी, मौके पर जाकर फीता डालकर तय होगा कि किसकी जमीन कहां से कहां तक है।
  3. नक्शे में सुधार: पहले नक्शा दुरुस्त होगा (Map Correction), उसके बाद ही चकबंदी का काम आगे बढ़ेगा।

अब 'अंदाजे' से काम नहीं चलेगा

पहले कई बार अधिकारी ऑफिस में बैठकर 'अंदाजे' से हिस्सा बांट देते थे, जिसे किसान सालों तक भुगतते थे। अब सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं कि AC और COC (चकबंदी अधिकारी) को खुद यह सुनिश्चित करना होगा कि गाटे की आकृति (Shape) और क्षेत्रफल (Area) में कोई अंतर न हो।

किसानों को क्या फायदा होगा?

इस बदलाव का सीधा मतलब है पारदर्शिता (Transparency)

  • अब कोई भी आपकी जमीन में एक इंच की भी बेईमानी नहीं कर पाएगा।
  • गांवों में लाठी-डंडे और अदालती चक्कर कम होंगे।
  • छोटे किसानों को उनकी सही जमीन मिलेगी, न कि दबंगों द्वारा छोड़ी गई बेकार जमीन।

योगी सरकार का यह कदम बताता है कि वो अब 'डिजिटल' और 'साफ-सुथरे' लैंड रिकॉर्ड्स की तरफ बढ़ रहे हैं। अब अगर कोई गड़बड़ी करने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम ही उसे पकड़ लेगा।

तो किसान भाइयों, अपनी खतौनी और कागज तैयार रखिए, क्योंकि अब इंसाफ मेज के नीचे से नहीं, बल्कि खुली आंखों से होगा