असद शासन के टॉर्चर सेल का सच: सीरियाई पूर्व जेल अधिकारी समीर ओसमान अलशेख को अमेरिका में 60 साल की जेल
अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ ऐतिहासिक न्यायिक मिसाल कायम करते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका की एक संघीय अदालत ने सीरियाई सेना के पूर्व उच्च अधिकारी समीर ओसमान अलशेख को छह दशक (60 साल) की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के क्रूर शासनकाल के दौरान कुख्यात डिटेंशन सेंटरों में बंद असहाय राजनीतिक बंदियों, असंतुष्टों और आम नागरिकों को अमानवीय शारीरिक व मानसिक यातनाएं देने के संगीन मामलों में अलशेख को यह ऐतिहासिक दंड दिया गया है। कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स स्थित फेडरल कोर्ट में सुनाया गया यह निर्णय उन अनगिनत पीड़ितों के लिए इंसाफ की एक बड़ी किरण बनकर उभरा है, जिन्होंने असद शासन की गुप्त कालकोठरियों में असहनीय क्रूरता झेली थी।
अदरा सेंट्रल प्रिजन का खौफनाक अतीत: यातनाओं की साजिश और बर्बरता के तीन संगीन मामलों में दोष साबित
लॉस एंजिल्स की संघीय अदालत में चली लंबी और गहन सुनवाई के बाद न्यायपीठ ने पूर्व सीरियाई सैन्य अधिकारी समीर ओसमान अलशेख को वर्ष 2005 से 2008 के बीच राजधानी दमिश्क के पास स्थित कुख्यात 'अदरा सेंट्रल प्रिजन' (Adra Prison) के मुख्य प्रभारी के रूप में काम करते हुए किए गए अमानवीय अपराधों का मुख्य जिम्मेदार ठहराया। मार्च के महीने में ही अदालत की निष्पक्ष जूरी ने अलशेख को कैदियों के खिलाफ संगठित यातनाएं रचने की आपराधिक साजिश के एक प्रमुख मामले और सीधे तौर पर प्रताड़ना देने के तीन अलग-अलग संगीन मामलों में पूरी तरह दोषी करार दिया था। अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्यों, फॉरेंसिक मेडिकल रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों के जरिए यह अकाट्य रूप से साबित कर दिया कि अलशेख की सीधी देखरेख में सरकारी हिरासत में बंद कैदियों पर ऐसे रूह कंपा देने वाले तरीके आजमाए जाते थे जो अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत गंभीर युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं।
'अकल्पनीय रूप से क्रूर और बर्बर': अमेरिकी संघीय जज ने सजा सुनाते हुए की तल्ख टिप्पणी
अलशेख को उसके जीवन के अंतिम पड़ाव तक जेल की सलाखों के पीछे भेजने का आदेश देते हुए अमेरिकी फेडरल जज ने बेहद सख्त और भावुक टिप्पणियां दर्ज कीं। अदालत के पीठासीन न्यायाधीश ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि अभियुक्त द्वारा अंजाम दिया गया व्यवहार घिनौना, अकल्पनीय रूप से क्रूर और लगभग शब्दों से परे हिंसक एवं बर्बर था। अदालत ने रेखांकित किया कि किसी भी संप्रभु राज्य की आड़ में सत्ता का ऐसा घिनौना दुरुपयोग मानवीय सभ्यता और सार्वभौमिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। न्यायिक पीठ ने स्पष्ट किया कि 60 वर्ष की यह कठोर सजा न केवल दोषी के क्रूर कृत्यों का न्यायोचित हिसाब है, बल्कि यह दुनिया भर के उन तमाम सैन्य कमांडरों और हुक्मरानों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है जो अपनी जनता पर जुल्म ढाकर विदेशी सरजमीं पर छिपने का मुगालता पालते हैं।
गुप्त कालकोठरियों में गायब होते लाखों नागरिक: संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट में असद सरकार बेनकाब
समीर ओसमान अलशेख को दी गई यह कठोर सजा सीरियाई सरकार के उस व्यापक और संगठित दमन तंत्र की पुष्टि करती है, जिसे लेकर वैश्विक संस्थाएं वर्षों से आवाज उठाती रही हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी प्रतिष्ठित मानवाधिकार संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष जांच आयोगों ने अपनी विस्तृत रिपोर्टों में बार-बार रेखांकित किया है कि बशर अल-असद के शासन में सरकारी सुरक्षा एजेंसियां बड़े पैमाने पर मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में लेती रही हैं। सीरिया की विभिन्न जेलों में हजारों राजनीतिक कैदियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या आधिकारिक आरोप के वर्षों तक गुप्त रूप से बंद रखा गया और उन पर भयानक थर्ड डिग्री टार्चर किया गया। इन पीड़ितों में से एक बहुत बड़ी संख्या ऐसी है जिनके परिवारों को आज तक यह जानकारी नहीं दी गई कि उनके अपने जीवित भी हैं या यातनाओं के चलते जेल की अंधेरी कोठरियों में हमेशा के लिए दफन हो चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय न्याय का दायरा: विदेशी सीमाओं से परे युद्ध अपराधियों पर कानूनी शिकंजा
अलशेख का यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायशास्त्र (Universal Jurisdiction) और अमेरिकी मानवाधिकार कानून के बढ़ते प्रभाव का एक बड़ा उदाहरण है। दशकों तक सीरियाई सत्ता की शक्ति का आनंद लेने के बाद जब पूर्व सैन्य अधिकारी अमेरिका पहुंचे, तो उन्हें लगा था कि उनका अतीत फाइलों में दब चुका है। हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के मानवाधिकार और विशेष अभियोजन अनुभाग ने सीरियाई नागरिक समाज और प्रताड़ना से बचे जीवित गवाहों के सहयोग से मजबूत कानूनी केस तैयार किया। इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों की कोई भौगोलिक सीमा या समय सीमा नहीं होती। विदेशी अदालतों में युद्ध अपराधियों को जवाबदेह ठहराने की इस न्यायिक प्रक्रिया ने वैश्विक स्तर पर यह मजबूत संदेश दिया है कि सत्ता के संरक्षण में बेगुनाहों का खून बहाने वाले जल्लाद दुनिया के किसी भी कोने में न्याय के लंबे हाथों से बच नहीं सकते।