पाकिस्तानी मंत्री के बयान पर शहबाज शरीफ घिरे, सोशल मीडिया पर उड़े जमकर मजाक

पाकिस्तानी मंत्री के बयान पर शहबाज शरीफ घिरे, सोशल मीडिया पर उड़े जमकर मजाक

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty - IWT) को लेकर कूटनीतिक गलियारों में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। हाल ही में पाकिस्तान के एक मंत्री ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान को बेहद 'ऐतिहासिक' करार दिया है, जिसमें उन्होंने भारत से सिंधु जल संधि पर अपने कदम पीछे खींचने की मांग की थी। पाकिस्तानी मंत्री का यह दावा सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स ने पाकिस्तान की फजीहत शुरू कर दी है। आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के नेता जिस तरह से घरेलू जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बेसिर-पैर के बयान दे रहे हैं, उसकी वजह से उन्हें ऑनलाइन जमकर ट्रोल किया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि भारत अब जल प्रबंधन और रणनीतिक मामलों पर किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है, और पाकिस्तान के ऐसे बयान केवल उसकी राजनीतिक विफलता को ही उजागर करते हैं।

सिंधु जल संधि और भारत का कड़ा रुख: अब पुरानी शर्तों पर नहीं चलेगा काम

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1960 में हुई सिंधु जल संधि दुनिया की सबसे सफल जल-बंटवारा संधियों में गिनी जाती रही है, लेकिन समय के साथ बदलते भू-राजनीतिक हालात और सीमा पार आतंकवाद के रुख को देखते हुए भारत ने इसमें संशोधन की सख्त जरूरत महसूस की है। भारत का स्पष्ट मानना है कि 'रक्त और पानी एक साथ नहीं बह सकते'। जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं से भारत के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक द्विपक्षीय संधियों के नियमों की समीक्षा करना भारत का संप्रभु अधिकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के जल हितों से समझौता करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पाकिस्तानी हुक्मरानों की यह छटपटाहट इस बात का सबूत है कि वे भारत द्वारा उठाए जा रहे कड़े कूटनीतिक और कानूनी कदमों से बुरी तरह बौखलाए हुए हैं।

पाकिस्तानी मंत्री का बचकाना दावा और शहबाज शरीफ का भाषण

पाकिस्तान के एक मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मंचों के इर्द-गिर्द प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा दिए गए भाषण को महान उपलब्धि बताते हुए दावा किया कि इससे भारत सिंधु जल संधि पर पीछे हटने के लिए मजबूर हो जाएगा। हालांकि, कूटनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यह बयान वास्तविकता से कोसों दूर और केवल घरेलू राजनीतिक माइलेज हासिल करने का एक घटिया प्रयास है। पाकिस्तान की जनता महंगाई, भुखमरी, बेरोजगारी और बिजली संकट से त्रस्त है, ऐसे में वहां की सरकार जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत विरोधी राग अलापने का पुराना हथकंडा अपना रही है। लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी अवाम और वैश्विक विश्लेषकों ने ही शहबाज शरीफ के इस भाषण और उनके मंत्रियों के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। लोगों का कहना है कि जिन देशों की अपनी अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के रहम और कर्ज पर चल रही हो, वे भारत को गीदड़भभकियां देकर कुछ हासिल नहीं कर सकते।

क्षेत्रीय जल सुरक्षा और भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर असर

नदी जल प्रबंधन और जल कूटनीति आज के दौर में किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा बन चुकी है। भारत अपनी बढ़ती आबादी, कृषि जरूरतों और ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सिंधु बेसिन की नदियों के पानी के अधिकतम और वैध इस्तेमाल की दिशा में लगातार बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। किशनगंगा और रतले जैसी पनबिजली परियोजनाओं पर भारत का काम इस बात का प्रमाण है कि नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय संधियों के दायरे में रहकर अपने हितों की रक्षा करना अच्छी तरह जानती है। पाकिस्तान के मंत्री चाहे जितने भी ऐतिहासिक भाषण देने का दावा करें, लेकिन धरातल की सच्चाई यह है कि भारत अब एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर चुका है जो अपनी शर्तों और राष्ट्रीय संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करता। जल बंटवारे के मोर्चे पर पाकिस्तान की यह बौखलाहट उसकी कूटनीतिक हार को ही दर्शाती है।

सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और कूटनीतिक भविष्य की दिशा

पाकिस्तान के मंत्रियों द्वारा शहबाज शरीफ के भाषण को ऐतिहासिक बताए जाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मीम्स और तीखी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। दुनिया भर के यूजर्स पाकिस्तान के इस पाखंड पर हंस रहे हैं कि जो देश अपने यहां की जनता को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दे पा रहा, वह भारत जैसी उभरती हुई वैश्विक आर्थिक और सैन्य महाशक्ति को चेतावनी देने का ढोंग कर रहा है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सिंधु जल संधि के संशोधन और पुनरावलोकन की प्रक्रिया पर भारत की ओर से और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। पाकिस्तान के लिए बेहतर यही होगा कि वह खोखली बयानबाजी छोड़कर अपने आंतरिक संकटों को सुलझाने पर ध्यान दे, क्योंकि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और जल हितों के मामले में किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।