समरकंद चेस ओलंपियाड में भारतीय टीम के साथ बड़ी लापरवाही
उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर समरकंद में शुरू होने वाले प्रतिष्ठित 46वें FIDE चेस ओलंपियाड से पहले भारतीय खेल जगत से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। टूर्नामेंट के आगाज से पहले गत चैंपियन के तौर पर उज्बेकी सरजमीं पर उतरी भारतीय पुरुष और महिला शतरंज टीमों को शुरुआत में ही गंभीर प्रबंधकीय लापरवाही का शिकार होना पड़ा। लंबी और थकान भरी यात्रा तय करके समरकंद एयरपोर्ट पहुंचे भारतीय खिलाड़ियों को डेरा डालने के लिए होटल में समय पर कमरे नहीं मिल सके। स्थिति इतनी खराब हो गई कि देश के शीर्ष ग्रैंडमास्टर्स और खिलाड़ियों को अपने ही कमरों की चाबी पाने के लिए करीब पांच घंटे तक लंबा और कष्टदायक इंतजार करना पड़ा। इस बड़ी अव्यवस्था ने टूर्नामेंट के आयोजन समिति के प्रबंधनों पर बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खिलाड़ियों और कप्तानों का सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
होटल के कमरे न मिलने और स्थानीय प्रबंधन की तरफ से कोई स्पष्ट जानकारी न दिए जाने के बाद भारतीय टीम के सदस्यों का सब्र जवाब दे गया। भारतीय पुरुष टीम के कप्तान और अनुभवी ग्रैंडमास्टर श्रीनाथ नारायणन ने इस पूरी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा कि फिडे शतरंज ओलंपियाड 2026 का अनुभव बेहद निराशाजनक और खराब रहा है। टीम को समरकंद पहुंचे हुए पांच घंटे बीत चुके हैं, लेकिन खिलाड़ियों को अब तक कमरे आवंटित नहीं किए गए हैं और न ही इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी है कि कमरे कब तक मिलेंगे। श्रीनाथ के अलावा देश के स्टार ग्रैंडमास्टर विदित गुजराती ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि समरकंद ओलंपियाड की पहली छाप बेहद खराब रही है और वे अब भी कमरों के मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
गत चैंपियन के रूप में मैदान में उतरी है भारतीय शतरंज ब्रिगेड
उल्लेखनीय है कि यह प्रतिष्ठित चेस ओलंपियाड शतरंज जगत की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित टीम स्पर्धा है, जिसमें दुनिया भर से सैकड़ों टीमें हिस्सा ले रही हैं। इस बार इस महामुकाबले में रिकॉर्ड तोड़ लगभग 400 टीमें अपना भाग्य आजमाने पहुंची हैं। भारतीय दल के लिए यह टूर्नामेंट और भी अधिक खास और प्रतिष्ठा का विषय है क्योंकि भारत इस बार गत चैंपियन के रूप में अपने खिताब का बचाव करने उतरा है। साल 2024 में बुडापेस्ट में हुए ओलंपियाड में भारतीय पुरुष और महिला दोनों ही टीमों ने स्वर्णिम इतिहास रचते हुए पहली बार एक साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किए थे। इस बार भी भारतीय ओपन वर्ग में विश्व चैंपियन डी. गुकेश, आर. प्रज्ञानानंदा, अर्जुन एरिगैसी, निहाल सरीन और विदित गुजराती जैसे धाकड़ खिलाड़ी शामिल हैं। वहीं महिला वर्ग में भी कोनेरू हम्पी, आर. वैशाली और दिव्या देशमुख जैसी दिग्गज खिलाड़ियों पर देश को एक बार फिर से स्वर्ण पदक दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी है।
शुरुआती बाधाओं को पीछे छोड़कर स्वर्ण पदक पर टिकी निगाहें
भले ही टूर्नामेंट की शुरुआत में भारतीय दल को होटल और आवास से जुड़ी इस असहज और खराब व्यवस्था का सामना करना पड़ा हो, लेकिन टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका पूरा ध्यान अब केवल और केवल खेल पर केंद्रित है। आयोजकों और स्थानीय शतरंज महासंघ के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार खिलाड़ियों को शाम तक कमरे उपलब्ध करा दिए गए और सभी ने राहत की सांस ली। हालांकि, दुनिया के सबसे बड़े मंच पर इस तरह की लचर व्यवस्था ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल आयोजनों के प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी है। अब तमाम मुश्किलों और शुरुआती मानसिक थकान को पीछे छोड़ते हुए करोड़ों खेल प्रेमियों की निगाहें एक बार फिर से डी. गुकेश और प्रज्ञानानंदा जैसे धुरंधरों पर टिक गई हैं, जो एक बार फिर समरकंद की बिसात पर तिरंगे का परचम बुलंद करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।