पुर्तगाल में 'भूत भगाने' के नाम पर डरावना खेल, नकली पादरी बनकर महिलाओं को बेहोश करता था तांत्रिक
पुर्तगाल के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक 'फातिमा श्राइन' (Fatima Shrine) के पास एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे कैथोलिक जगत को हिलाकर रख दिया है। एक शॉपिंग सेंटर के बेसमेंट में 27 वर्षीय युवक फ्रांसिस्को मार्केस खुद को 'एक्सॉर्सिस्ट' (भूत भगाने वाला) बताकर अंधविश्वास का काला धंधा चला रहा था। पादरी की पोशाक पहनकर लोगों को सम्मोहित करने और 'पवित्र' नमक-पानी बेचने वाले इस तथाकथित तांत्रिक के खेल पर अब वेटिकन और स्थानीय चर्च प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया है।
बेसमेंट में चलता था 'भूत भगाने' का अवैध शिविर
कैथोलिक पादरियों का लंबा काला चोगा (Cassock) और रोमन कॉलर पहने फ्रांसिस्को मार्केस बिल्कुल असली पादरी की तरह दिखता है। शनिवार के दिन, जब 100 से अधिक लोग वहां जमा होते हैं, तो वह एक-एक कर लोगों के माथे पर हाथ रखता है। उसके हाथ रखते ही वहां मौजूद महिलाएं अचानक पीछे की ओर गिरने लगती हैं, जिन्हें वहां तैनात उसके सहायक संभाल लेते हैं। चर्च के अधिकारियों ने इसे धार्मिक आस्था के नाम पर लोगों, विशेषकर महिलाओं का मानसिक और आर्थिक शोषण करार दिया है।
चर्च ने किया किनारा, बताया 'अवैध और संदिग्ध'
इस पूरे मामले पर कैथोलिक चर्च ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस रिट्रीट का वेटिकन या चर्च की किसी भी आधिकारिक संस्था से कोई लेना-देना नहीं है। बिशप और चर्च प्रशासन ने स्पष्ट किया कि 'एक्सॉर्सिज्म' (बुरी आत्माओं को भगाने) की प्रथा कैथोलिक धर्म में मान्य जरूर है, लेकिन इसके लिए बेहद कड़े नियम और विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। केवल अधिकृत पादरियों को ही इसे संचालित करने का अधिकार है। चर्च ने आम जनता को चेतावनी दी है कि ऐसे अवैध शिविरों में न जाएं, जहां धर्म की आड़ में लोगों को ठगा जा रहा है।
'जादुई' नमक-पानी और अभिषेक के नाम पर कमाई
फ्रांसिस्को मार्केस का यह खेल सिर्फ प्रार्थना तक सीमित नहीं है। वह अपने 'चैपल' में आने वाले लोगों को 'पवित्र' नमक, अभिमंत्रित जल और अभिषेक के लिए खास तेल खरीदने के लिए भी प्रोत्साहित करता है। मार्केस को एक इतालवी नागरिक साल्वाटोर मिकालेफ का समर्थन हासिल है, जो खुद को उसका 'बिशप' बताता है। मिकालेफ का दावा है कि मार्केस के अंदर बुरी आत्माओं को भगाने की 'दिव्य शक्ति' है, जिसे लेकर पुर्तगाल का धार्मिक प्रशासन पूरी तरह से इनकार कर रहा है।
आस्था के नाम पर शोषण: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
एक्सॉर्सिज्म एक बेहद संवेदनशील और प्राचीन प्रथा है। हालांकि कुछ कैथोलिक समुदाय इसे आज भी मानते हैं, लेकिन धर्मगुरुओं का कहना है कि मार्केस जैसे लोग भोले-भाले और असहाय लोगों की मानसिक कमजोरी का फायदा उठा रहे हैं। फातिमा श्राइन के पास चल रहे इस बेसमेंट ऑपरेशन ने न केवल स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींचा है, बल्कि वेटिकन तक इस मामले की गूंज सुनाई दे रही है। चर्च की सख्त चेतावनी के बाद अब इन तथाकथित तांत्रिकों पर कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बढ़ गई है।