Pakistan Fatah-IV Test: पाकिस्तान ने फतह-4 एक्सटेंडेड रेंज क्रूज मिसाइल का किया सफल परीक्षण, पीएम शहबाज और मुनीर ने दी बधाई; जानें खासियतें
पड़ोसी देश पाकिस्तान ने अपने मिसाइल शस्त्रागार और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता को धार देते हुए स्वदेशी रूप से विकसित फतह-4 (Fatah-IV) ग्राउंड-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल के विस्तारित रेंज (Extended Range) वाले उन्नत संस्करण का सफल परीक्षण किया है। पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, मंगलवार को यह परीक्षण देश के अज्ञात परीक्षण स्थल से सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल के विभिन्न सब-सिस्टम्स, नेविगेशन एक्यूरेसी और दुश्मन के एयर डिफेंस को चकमा देने की सर्वाइवेबिलिटी से जुड़े सभी तकनीकी पैमानों का व्यापक सत्यापन किया गया। इस सफल परीक्षण को देखते हुए पाकिस्तानी सेना और रणनीतिक कमान के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और इंजीनियर मौके पर मौजूद रहे।
पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने थपथपाई वैज्ञानिकों की पीठ
फतह-4 के सफल उड़ान परीक्षण के तुरंत बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के थल सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर सहित तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने इस अभियान से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और सैन्य कर्मियों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इस सफल परीक्षण ने एक बार फिर देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने की अटूट प्रतिबद्धता को साबित किया है। वहीं सेना प्रमुख असीम मुनीर ने इस उपलब्धि को पाकिस्तान की पारंपरिक निवारक (Conventional Deterrence) क्षमता को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर करार दिया। पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि इस मिसाइल के सेना में शामिल होने से थल सेना की रॉकेट फोर्स को सीमा पार गहरे सामरिक ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाने में बड़ी बढ़त मिलेगी।
क्या हैं फतह-4 क्रूज मिसाइल की मुख्य तकनीकी विशेषताएं
पाकिस्तानी सेना की फतह (F-Series) मिसाइल प्रणाली पारंपरिक आर्टिलरी रॉकेट से विकसित होकर अब अत्याधुनिक क्रूज और गाइडेड हथियारों के दायरे में पहुंच चुकी है। फतह-4 ग्राउंड-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल की प्रमुख तकनीकी खूबियां इस प्रकार हैं:
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विस्तारित मारक रेंज: पूर्व में फतह-4 का प्रशिक्षण परीक्षण 750 किलोमीटर की दूरी पर किया गया था, जबकि इस नए एक्सटेंडेड वर्जन की रेंज को और अधिक बढ़ाया गया है, जिससे यह दुश्मन के आंतरिक सैन्य अड्डों, रडार स्टेशनों और कमांड सेंटर्स को सीधे निशाना बनाने में सक्षम है।
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एडवांस्ड एवियोनिक्स और नेविगेशन: सेना के अनुसार यह मिसाइल अत्याधुनिक एवियोनिक्स, सैटेलाइट नेविगेशन (GNSS) और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) के हाइब्रिड मॉडल से लैस है, जो जीपीएस जैमिंग वाले माहौल में भी 'पिन-पॉइंट एक्यूरेसी' सुनिश्चित करता है।
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टैरेन हगिंग और लो-एल्टीट्यूड फ्लाइट: एक अत्याधुनिक क्रूज मिसाइल होने के नाते फतह-4 जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर पहाड़ों और घाटियों की सतह के समानांतर (Terrain Hugging) उड़ान भरती है, जिससे पारंपरिक रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए इसे पहले से ट्रैक और इंटरसेप्ट करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
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घातक वारहेड क्षमता: यह पारंपरिक विस्फोटक और रणनीतिक पेलोड ले जाने में पूरी तरह सक्षम है, जिससे बंकरों, हवाई पट्टियों और सघन सैन्य ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
फतह सीरीज का विकास और पाकिस्तान की रक्षा रणनीति
पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों से अपनी 'फतह' मिसाइल श्रृंखला पर तेजी से काम कर रहा है। वर्ष 2021 में फतह-1 (140 किमी रेंज) के परीक्षण से शुरू हुआ यह सफर फतह-2 (400 किमी रेंज) से गुजरते हुए अब फतह-4 और आगे फतह-5 की दिशा में बढ़ रहा है। फतह-4 के इस नए सफल परीक्षण का मुख्य उद्देश्य सीमा पर मोबाइल लॉन्चर ट्रकों के जरिए त्वरित तैनाती और पहले हमले के तुरंत बाद जवाबी स्ट्राइक करने की क्षमता हासिल करना है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप में आधुनिक एयर डिफेंस प्रणालियों की तैनाती को देखते हुए पाकिस्तान अपने स्टैंड-ऑफ हथियारों की रेंज और रडार से बचने की तकनीक में लगातार बदलाव कर रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और शक्ति संतुलन पर क्या पड़ेगा असर
फतह-4 के इस ताजा परीक्षण ने दक्षिण एशिया के सैन्य और कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। यद्यपि पाकिस्तान इसे अपनी आत्मरक्षा और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने का वैध प्रयास बता रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सीमा के निकट लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों की तैनाती क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को संवेदनशील बना सकती है। भारत की एस-400 (S-400 Triumf) और स्वदेशी आकाश-एमआरएसएएम (MRSAM) जैसी आधुनिक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणालियां हालांकि कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम हैं, लेकिन इस तरह के परीक्षण दोनों देशों के बीच मिसाइल तकनीकी होड़ और आधुनिकीकरण की गति को और तेज करने का संकेत देते हैं।