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बंगाल की खाड़ी में उत्तर कोरिया की खुफिया दस्तक! म्यांमार बना रहा अपनी पहली खतरनाक पनडुब्बी

भारत के समुद्री पड़ोस और बंगाल की खाड़ी के शांत पानी में एक नया और बेहद चौंकाने वाला भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ रहा है। सामरिक विशेषज्ञों और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, म्यांमार की सैन्य सरकार (जुंटा) उत्तर कोरिया की मदद से अपनी पहली स्वदेशी पनडुब्बी (Submarine) का निर्माण करने में जुटी हुई है। इस खुफिया प्रोजेक्ट में किम जोंग उन के देश उत्तर कोरिया की एंट्री ने पूरी दुनिया के रक्षा जानकारों को हैरान कर दिया है। चूंकि बंगाल की खाड़ी सीधे तौर पर भारत के पूर्वी नौसैनिक कमान और सामरिक ठिकानों से जुड़ी हुई है, इसलिए म्यांमार और उत्तर कोरिया का यह नया गठजोड़ सीधे तौर पर नई दिल्ली के लिए एक नई सुरक्षा चुनौती खड़ी कर सकता है।

म्यांमार का सीक्रेट सबमरीन प्रोजेक्ट और उत्तर कोरियाई कनेक्शन

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का दावा है कि म्यांमार काफी समय से अपनी नौसेना को आधुनिक बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए उसने पहले भारत से एक पुरानी सिंधुघोष श्रेणी की पनडुब्बी (आईएनएस सिंधुवीर) और बाद में चीन से एक मिंग-क्लास सबमरीन हासिल की थी। लेकिन अब म्यांमार अपनी खुद की पनडुब्बी क्षमता विकसित करना चाहता है। इस काम में उत्तर कोरिया की संन्य और तकनीकी सहायता ली जा रही है, जो पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद मिसाइल और सबमरीन तकनीक में माहिर माना जाता है। उत्तर कोरियाई इंजीनियरों और म्यांमार के नौसैनिक अधिकारियों के बीच यह सीक्रेट डील हिंद महासागर में शक्ति संतुलन को बिगाड़ सकती है।

क्या भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पैदा हो गया है बड़ा खतरा?

बंगाल की खाड़ी में उत्तर कोरिया और म्यांमार की यह जुगलबंदी भारत के लिए निश्चित रूप से चिंता का विषय है। भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह इस क्षेत्र के बेहद करीब है, जहां भारतीय सेना का एकमात्र त्रि-सेवा कमान (Tri-Services Command) मौजूद है। म्यांमार के पास आधुनिक पनडुब्बी तकनीक आने और वहां उत्तर कोरियाई या चीनी खुफिया एजेंसियों की सक्रियता बढ़ने से भारत के पूर्वी तट, विशाखापट्टनम नौसैनिक बेस और हमारे मिसाइल टेस्टिंग रेंज (व्हीलर द्वीप) की सुरक्षा की निगरानी बढ़ाना बेहद जरूरी हो जाएगा। हालांकि, भारतीय नौसेना इस पूरे क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति और पी-8आई पोसिडन जैसे सबमरीन-हंटर विमानों के जरिए कड़ी नजर रख रही है।

चीन, म्यांमार और उत्तर कोरिया का त्रिकोण: भारत की अगली रणनीति क्या होगी?

इस पूरे मामले का एक और चिंताजनक पहलू यह है कि म्यांमार पर चीन का भी भारी प्रभाव है। यदि म्यांमार, उत्तर कोरिया और चीन मिलकर बंगाल की खाड़ी में एक नया त्रिकोण बनाते हैं, तो यह भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) और समुद्री सुरक्षा को सीधे चुनौती देगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को म्यांमार की सैन्य सरकार के साथ अपने कूटनीतिक और रक्षा संबंधों को और मजबूत करना चाहिए ताकि उन्हें पूरी तरह से चीन या उत्तर कोरिया के पाले में जाने से रोका जा सके। इसके साथ ही, भारत को अपनी पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं (Anti-Submarine Warfare) को और अधिक धार देनी होगी ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते बेअसर किया जा सके।

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