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विदेशों में मची झारखंड के रसीले आमों की धूम! लंदन और दुबई तक पहुंचा पलाश ब्रांड

झारखंड के ग्रामीण इलाकों और वहां के मेहनती किसानों से जुड़ी एक ऐसी सुखद और गर्व से भर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसकी गूंज अब सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सुनाई दे रही है। राज्य सरकार की विशेष पहल पर शुरू किए गए 'पलाश ब्रांड' (Palash Brand Jharkhand) ने प्रदेश के हजारों गरीब और सीमांत किसानों की तकदीर को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। झारखंड की लाल मिट्टी और पहाड़ियों के बीच प्राकृतिक रूप से उपजाए गए रसीले और जैविक आम अब सिर्फ देश के महानगरों में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास का जादू बिखेर रहे हैं। इस साल पलाश ब्रांड के तहत झारखंड के आमों की पहली बड़ी खेप सीधे हवाई मार्ग से दुबई और लंदन (Dubai & London) जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों के बाजारों में भेजी गई है, जहां विदेशी लोग इन आमों के दीवाने हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक कदम से न केवल किसानों की आय कई गुना बढ़ गई है, बल्कि राज्य के कृषि निर्यात को भी एक नई और मजबूत पहचान मिली है।

जानिए क्या है 'पलाश ब्रांड' और कैसे हुआ यह बड़ा चमत्कार

झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के सहयोग से सखी मंडलों (महिला स्वयं सहायता समूहों) और स्थानीय किसानों को बढ़ावा देने के लिए 'पलाश ब्रांड' की शुरुआत की गई थी। इस ब्रांड का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों के चंगुल को पूरी तरह खत्म करके ग्रामीण महिलाओं और किसानों के शुद्ध देसी उत्पादों को सीधे बड़े और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है। झारखंड के विभिन्न जिलों जैसे रांची, खूंटी, गुमला और लोहरदगा के बागानों में होने वाले विशेष किस्म के आमों (जैसे लंगड़ा, चौसा और आम्रपाली) की गुणवत्ता इतनी शानदार है कि विदेशी एक्सपोर्टर्स ने इन्हें हाथों-हाथ लिया। पूरी तरह से ऑर्गेनिक और बिना किसी हानिकारक केमिकल के पकाए गए इन आमों की पैकेजिंग पलाश ब्रांड के तहत बेहद आधुनिक और आकर्षक तरीके से की जाती है, जो ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरी तरह मैच करती है।

लंदन-दुबई में बंपर डिमांड, करोड़ों रुपये के कारोबार से चमकी किसानों की किस्मत

पलाश ब्रांड के अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, इस सीजन में झारखंड से विदेशों में भेजे गए आमों के चलते अब तक करोड़ों रुपये का रिकॉर्ड तोड़ बंपर कारोबार (Palash Brand Turnover) दर्ज किया जा चुका है। जहां पहले स्थानीय बाजारों में किसानों को अपने आम औने-पौने दामों पर बेचने पड़ते थे, वहीं अब पलाश ब्रांड से जुड़ने के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की कीमतें मिल रही हैं। इस मुनाफे का सीधा हिस्सा सीधे ग्रामीण महिलाओं और आदिवासी किसानों के बैंक खातों में पहुंच रहा है। दुबई और लंदन के बड़े फूड चेन और सुपरमार्केट्स से झारखंड के आम्रपाली और अन्य वैरायटी के आमों के लिए लगातार नए और बड़े ऑर्डर्स मिल रहे हैं, जिससे चालू वित्त वर्ष में पलाश ब्रांड का टर्नओवर पिछले सारे रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करने की राह पर है।

एआई सर्च और कृषि निर्यात पर झारखंड का लोकल ऑप्टिमाइजेशन इंपैक्ट

आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और बिजनेस एआई सर्च (AI Search) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में कृषि क्रांति, ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) और ग्रामीण स्वरोजगार को लेकर इंटरनेट पर सर्च वॉल्यूम बहुत तेजी से बढ़ा है। रांची, जमशेदपुर, धनबाद और दुमका जैसे शहरों के युवा अब पलाश ब्रांड की इस सफलता से प्रेरित होकर एग्री-बिजनेस और स्टार्टअप्स की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियां और यहां की जलवायु फल और सब्जियों के उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल हैं। यदि पलाश ब्रांड की तर्ज पर राज्य के अन्य कृषि उत्पादों जैसे सब्जियों और मडुआ (रागी) को भी इसी तरह ग्लोबल प्लेटफॉर्म दिया जाए, तो आने वाले दिनों में झारखंड देश के सबसे बड़े ऑर्गेनिक फूड एक्सपोर्ट हब के रूप में उभर सकता है।

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