'पाकिस्तान को भारत से नहीं, अपनों से है खतरा': मरियम नवाज का चौंकाने वाला बयान
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) की वरिष्ठ नेता मरियम नवाज ने देश के दशकों पुराने राजनीतिक और सैन्य नैरेटिव पर करारी चोट करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। लाहौर में एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक कार्यक्रम और सार्वजनिक संबोधन के दौरान मरियम नवाज ने दो-टूक कहा कि पाकिस्तान के अस्तित्व को भारत या किसी अन्य बाहरी देश से कोई खतरा नहीं है, बल्कि इस मुल्क को इसके अपने ही हुक्मरानों और भ्रष्ट व्यवस्था ने भीतर से खोखला किया है। पाकिस्तान की पारंपरिक विदेश नीति और सुरक्षा प्रतिष्ठान द्वारा वर्षों से बेचे जा रहे 'भारतीय खतरे' के सिद्धांत को खारिज करते हुए नवाज शरीफ की बेटी ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि देश की बदहाली, आर्थिक तबाही और अराजकता के लिए बाहर का कोई दुश्मन नहीं, बल्कि मुल्क के अपने ही लोग जिम्मेदार हैं जिन्होंने संसाधनों की खुली लूट मचाई। मरियम के इस बेबाक और चौंकाने वाले कबूलनामे ने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय (GHQ) तक भारी हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि ऐसा पहली बार देखा जा रहा है जब सत्ताधारी दल का कोई शीर्ष नेता खुले मंच से भारत को क्लीन चिट देते हुए आंतरिक विफलताओं को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर रहा है।
खैबर पख्तूनख्वा और पीटीआई पर तीखा वार: 'वहां से फैल रहा है आतंकवाद का जहर'
अपने संबोधन में मरियम नवाज ने पाकिस्तान में फिर से सिर उठा रहे आतंकवाद और हिंसा के लिए सीधे तौर पर खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत की सरकार और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से अधिक समय से खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई की हुकूमत है, लेकिन उन्होंने सूबे में न तो कोई बुनियादी ढांचा विकसित किया और न ही पुलिस व आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) को मजबूत बनाया। मरियम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केपी प्रांत से चलने वाले राजनीतिक एजेंडे और आतंकवादियों के प्रति दिखाई जाने वाली नरमी का खामियाजा आज पूरा पाकिस्तान भुगत रहा है। उन्होंने कहा कि जब आतंकवादियों को मुख्यधारा में बसाने और उनके साथ समझौते करने की आत्मघाती नीतियां अपनाई गईं, उसी का नतीजा है कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) आज दोबारा मजबूत होकर सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को अपना निशाना बना रहा है। पंजाब की मुख्यमंत्री ने दो-टूक कहा कि केपी के हुक्मरान अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए केंद्र और पंजाब पर उंगलियां उठाते हैं, जबकि हकीकत यह है कि उन्होंने खुद अपने प्रांत को उग्रवाद की नर्सरी बनने की खुली छूट दे रखी है।
बलूचिस्तान में सुलगती आग और अलगाववाद: 'देश को तोड़ने वालों पर कड़ा प्रहार जरूरी'
खैबर पख्तूनख्वा के साथ-साथ मरियम नवाज ने पाकिस्तान के सबसे बड़े और अशांत प्रांत बलूचिस्तान के बिगड़ते हालात पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में आए दिन हो रहे आतंकवादी हमले, सुरक्षा चौकियों पर आत्मघाती हमले, चीनी नागरिकों पर निशाना और पंजाब से आने वाले बेकसूर मजदूरों का कत्लेआम अब बर्दाश्त की सीमा से बाहर हो चुका है। मरियम ने कहा कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य अलगाववादी संगठन विकास परियोजनाओं और राष्ट्रीय एकता को पटरी से उतारने की साजिश रच रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि बलूचिस्तान की अवाम के वाजिब हकों को वहां के स्थानीय सरदारों और भ्रष्ट राजनीतिक जमात ने दबाकर रखा है, जिसके कारण नौजवानों के असंतोष का फायदा देशद्रोही ताकतें उठा रही हैं। मरियम नवाज का साफ कहना था कि जब तक बलूचिस्तान और केपी में पनप रहे उग्रवाद पर कठोर प्रशासनिक और सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक पाकिस्तान में किसी भी प्रकार का आर्थिक स्थायित्व या विदेशी निवेश आना नामुमकिन है।
'अपनों ने ही मुल्क को दोनों हाथों से लूटा': आर्थिक बर्बादी का कड़वा सच
मरियम नवाज ने पाकिस्तान के चरमराते आर्थिक ढांचे और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सामने फैले हाथ का जिक्र करते हुए देश के संभ्रांत वर्ग, भ्रष्ट राजनेताओं और संस्थागत तंत्र पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि 77 वर्षों के इतिहास में यह झूठ फैलाया गया कि हमारे संकटों का कारण बाहरी ताकते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि मुल्क के खजाने को अपनों ने ही दोनों हाथों से लूटा और विदेशों में संपत्तियां खड़ी कीं। उन्होंने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग देश की संपत्ति को अपनी निजी जागीर समझकर नोचेंगे, तो उसका परिणाम वही होगा जो आज पाकिस्तान झेल रहा है—रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, बेरोजगारी और विदेशी कर्ज का जाल। मरियम ने कहा कि पंजाब प्रांत में उनकी सरकार सुशासन, पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और जनहित की योजनाओं के जरिए व्यवस्था सुधारने की कोशिश कर रही है, लेकिन जब तक पूरे पाकिस्तान से इस संगठित लूट और आंतरिक राजनीतिक ब्लैकमेलिंग का खात्मा नहीं होगा, तब तक देश अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता।
भारत विरोधी नैरेटिव के खात्मे के संकेत? पाकिस्तान की राजनीति में छिड़ी नई बहस
मरियम नवाज का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनके पिता और तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ भी बार-बार भारत के साथ रिश्ते सुधारने, सीमा पार व्यापार बहाल करने और पुराने कटु इतिहास को भुलाने की वकालत करते रहे हैं। शरीफ परिवार हमेशा से भारत के साथ आर्थिक और कूटनीतिक सामान्यीकरण का पैरोकार रहा है, क्योंकि वे जानते हैं कि जब तक भारत के साथ तनाव का बहाना बनाकर सैन्य बजट बढ़ाया जाता रहेगा, तब तक आम जनता के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के लिए पैसा नहीं बचेगा।
मरियम के इस बयान के बाद पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां, विशेष रूप से पीटीआई, उन पर हमलावर हो गई हैं और उन्हें 'सुरक्षा बलों की कुर्बानियों को कम आंकने' तथा 'भारत का पक्ष लेने' का आरोप लगा रही हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मरियम नवाज का यह बयान पाकिस्तान के भीतर एक बड़े मनोवैज्ञानिक बदलाव का प्रतीक है। अवाम अब इस बात को भली-भांति समझने लगी है कि भारत का हौवा दिखाकर केवल देश का ध्यान असल समस्याओं से भटकाया जाता रहा है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के भीतर भड़कती हिंसा ने यह पूरी तरह उजागर कर दिया है कि पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन उसकी अपनी सीमा के भीतर और उसकी अपनी विफल नीतियों में छिपा हुआ है।