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बालेन शाह के बदले सुर: भारत के खिलाफ आग उगलने के बाद बैकफुट पर आए काठमांडू के मेयर

नेपाल की राजनीति और भारत-नेपाल द्विपक्षीय संबंधों के गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। भारत के खिलाफ लगातार आक्रामक और तीखी बयानबाजी करने वाले काठमांडू के मेयर बालेन शाह (Balendra Shah) के तेवर अब ढीले पड़ते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से भारत को लेकर लंबी-लंबी हांकने और विवादित टिप्पणियां करने के बाद आखिरकार बालेन शाह लाइन पर आ गए हैं। ब्रिटेन की मध्यस्थता को लेकर दिए गए अपने एक बेहद संवेदनशील और विवादित बयान पर चौतरफा घिरने के बाद काठमांडू के मेयर ने अब इस पूरे मामले पर अपनी औपचारिक सफाई पेश की है, जिसने नेपाल से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज कर दी है।

ब्रिटेन की मध्यस्थता वाले विवादित बयान पर मचे बवाल से घिरे मेयर

पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब बालेन शाह ने भारत और नेपाल के बीच के कुछ द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने के लिए तीसरे पक्ष यानी ब्रिटेन की मध्यस्थता की वकालत कर दी थी। इस बयान के सामने आते ही न केवल भारत में बल्कि खुद नेपाल के भीतर भी उनके खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। नेपाल के कूटनीतिक विशेषज्ञों, पूर्व राजनयिकों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने बालेन शाह के इस रुख को बेहद अपरिपक्व और नेपाल की संप्रभुता के खिलाफ बताया। जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' के संबंधों और सीधे संवाद की व्यवस्था होने के बावजूद तीसरे देश को बीच में घसीटना एक बेहद गंभीर कूटनीतिक भूल थी, जिसने मेयर को बैकफुट पर आने के लिए मजबूर कर दिया।

चौतरफा दबाव के बाद बालेन शाह ने दी कूटनीतिक सफाई

नेपाल की राजधानी काठमांडू के स्थानीय राजनीतिक गलियारों और राष्ट्रीय मीडिया में लगातार हो रही किरकिरी के बाद मेयर बालेन शाह ने अपने बयान को मोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने अपनी नई सफाई में कहा है कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और वे भारत के साथ नेपाल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का पूरा सम्मान करते हैं। मेयर सचिवालय की ओर से जारी संकेतों के अनुसार, उनका इरादा दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के तनाव को बढ़ाना नहीं था, बल्कि वे केवल स्थानीय और विकास से जुड़े कुछ मुद्दों के संदर्भ में बात कर रहे थे। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बालेन शाह ने यह सफाई केवल चौतरफा कूटनीतिक और राजनीतिक दबाव से बचने के लिए दी है।

भारत-नेपाल संबंधों पर क्या होगा इस सियासी ड्रामे का असर

नई दिल्ली और काठमांडू के बीच सीमा विवाद, सुगौली संधि और अन्य द्विपक्षीय समझौतों को लेकर पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई है। ऐसे में बालेन शाह जैसे लोकप्रिय और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले नेता द्वारा इस तरह के बयान देना और फिर पलट जाना, नेपाल की आंतरिक राजनीति के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। भारत हमेशा से ही नेपाल के साथ अपने द्विपक्षीय मामलों को बिना किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप के, आपसी बातचीत से सुलझाने का पक्षधर रहा है। जानकारों के मुताबिक, बालेन शाह के इस यू-टर्न से यह साफ हो गया है कि भारत जैसे मजबूत पड़ोसी देश के खिलाफ बिना सोचे-समझे की गई बयानबाजी नेपाल के ही नेताओं के लिए भारी पड़ सकती है।

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