संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान: अमेरिका ने लगाई कड़ी पाबंदियां, होटल से बाहर जाने पर सख्त रोक
वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के वार्षिक उच्चस्तरीय सत्र के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बीच दशकों पुराना कड़वा भू-राजनीतिक गतिरोध एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने आ गया है। पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य तनाव, परमाणु हथियारों की होड़ और रणनीतिक जलमार्गों की नाकाबंदी के बीच ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान इस वैश्विक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। लेकिन उनके अमेरिकी धरती पर कदम रखते ही जो बाइडेन प्रशासन के विदेश विभाग (US State Department) ने उन पर और उनके साथ आए राजनयिक प्रतिनिधिमंडल पर बेहद कड़े, असाधारण और अभूतपूर्व यात्रा प्रतिबंध (Movement Restrictions) लागू कर दिए हैं। अमेरिका के इन सख्त सुरक्षा नियमों के कारण ईरानी राष्ट्रपति न्यूयॉर्क शहर के भीतर एक सामान्य राष्ट्राध्यक्ष की तरह स्वतंत्र आवाजाही नहीं कर सकेंगे, जिससे संयुक्त राष्ट्र के गलियारों में कूटनीतिक हलचल और गरमा गई है।
होटल और यूएन मुख्यालय के बीच कैद ईरानी राष्ट्रपति: खरीदारी और सैर पर लगा कड़ा अमेरिकी पहरा
अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' द्वारा प्रकाशित विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात महीनों से तेहरान और वाशिंगटन के बीच चल रहे सैन्य टकराव के मद्देनजर राष्ट्रपति पेजेश्कियान को न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान सख्त प्रशासनिक पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग के नए प्रोटोकॉल के मुताबिक ईरानी राष्ट्रपति केवल मैनहट्टन स्थित अपने आधिकारिक होटल और संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (UN Headquarters) परिसर के बीच ही आ-जा सकेंगे। इसके अलावा उन्हें न्यूयॉर्क के किसी भी अन्य सार्वजनिक स्थान पर जाने, दर्शनीय स्थलों को देखने, बाजार में खरीदारी करने या निजी यात्राओं की पूर्णतः मनाही की गई है। यदि ईरानी प्रतिनिधिमंडल या राष्ट्रपति को निर्धारित सीमित क्षेत्र से बाहर किसी भी स्थान पर जाना हो, तो उन्हें पहले अमेरिकी सरकार से विशेष कूटनीतिक अनुमति (Special Clearance) लेनी होगी। यह कदम दिखाता है कि अमेरिका अपने घरेलू कानूनों और वैश्विक प्रतिबंधों का इस्तेमाल ईरान पर मनोवैज्ञानिक और राजनयिक दबाव बनाने के लिए किस हद तक कर रहा है।
यूएन के मंच से आत्मरक्षा का तर्क देगा ईरान: अमेरिकी और इजरायली आक्रामकता पर पलटवार की तैयारी
वैश्विक थिंक-टैंक 'इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप' (ICG) के वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ रिचर्ड गोवन के विश्लेषण के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान महासभा के अपने संबोधन का उपयोग अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान का पक्ष मजबूती से रखने के लिए करेंगे। पेजेश्कियान दुनिया के सामने यह दलील पेश करेंगे कि ईरान कभी भी आक्रामक देश नहीं रहा है, बल्कि वह लंबे समय से अमेरिका और इजरायल की साम्राज्यवादी और सैन्य आक्रामकता का सीधा शिकार होता आया है। ईरानी पक्ष का मुख्य तर्क यह रहेगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक सुरक्षा हो या क्षेत्रीय स्तर पर उनके द्वारा उठाए गए कदम, वे सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत वैध आत्मरक्षा (Right to Self-Defense) के दायरे में आते हैं। इसके साथ ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में कई प्रमुख अमेरिकी और यूरोपीय थिंक-टैंकों के शीर्ष नीति विश्लेषकों और रणनीतिकारों से बंद कमरों में बैक-चैनल बातचीत करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े कानूनी प्रावधानों के चलते पश्चिमी विश्लेषक ईरानी अधिकारियों के साथ खुलकर बैठकें करने से हिचकिचा रहे हैं ताकि वे किसी कानूनी विवाद में न फंसें।
परमाणु ठिकानों पर 12 दिवसीय बमबारी के एक साल बाद दौरा: होर्मुज जलडमरूमध्य में चरम पर तनाव
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का यह न्यूयॉर्क दौरा पिछले एक वर्ष में हुए भीषण तनाव और सीधे युद्ध के मुहाने पर खड़े हालातों के बाद हो रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल ईरान के भूमिगत यूरेनियम संवर्धन और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाकर अमेरिका और इजरायल द्वारा लगातार 12 दिनों तक विनाशकारी बमबारी और सटीक हवाई हमले किए गए थे। उस भीषण सैन्य टकराव के कुछ ही महीनों बाद ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। वर्तमान समय में भी परिस्थितियां बेहद नाजुक हैं; एक तरफ जहां ईरान के तेजी से बढ़ते परमाणु कार्यक्रम और उन्नत सेंट्रीफ्यूज को लेकर पश्चिमी देश सशंकित हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Strait) में वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की स्वतंत्र आवाजाही में पैदा की जा रही बाधाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के बीच बारूद का ढेर कभी भी सुलगने को तैयार है।
ट्रंप का कड़ा रुख और वार्ता की अनिश्चितता: परमाणु हथियार पर रोक की दो-टूक चेतावनी
दूसरी ओर, अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ किसी भी पूर्व या भावी सैन्य कार्रवाई का पुरजोर बचाव करते हुए तेहरान पर बेहद आक्रामक आरोप मढ़े हैं। ट्रंप ने अपने बयानों में दो-टूक कहा है कि उनके रहते या अमेरिका के मौजूदा सुरक्षा ढांचे के तहत ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम (Nuclear Weapon) विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि विरोधाभासी बयानों के बीच ट्रंप ने यह संकेत भी दिया है कि वे परिस्थितियों के अनुरूप पेजेश्कियान से आमने-सामने बातचीत करने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और वैश्विक सुरक्षा परिषद के कई अनुभवी राजनयिकों का स्पष्ट मानना है कि इस वार्षिक सम्मेलन के दौरान वाशिंगटन और तेहरान के बीच किसी बड़े कूटनीतिक समझौते या शांति समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है। दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी इतनी गहरी हो चुकी है कि किसी भी औपचारिक और गंभीर वार्ता की शुरुआत केवल भविष्य में ही संभव हो सकेगी, जबकि वर्तमान में केवल आरोप-प्रत्यारोप और शक्ति प्रदर्शन का दौर ही देखने को मिलेगा।