ईरान को मिल सकते हैं रूस के सबसे घातक Su-35 फाइटर जेट

ईरान को मिल सकते हैं रूस के सबसे घातक Su-35 फाइटर जेट

मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और युद्ध की लपटों के बीच एक ऐसी सामरिक खबर सामने आई है, जिसने वाशिंगटन से लेकर तेल अवीव तक हलचल तेज कर दी है। तेहरान द्वारा पुष्टि की गई है कि ईरान ने रूस से अत्यंत आधुनिक और खतरनाक सुखोई Su-35 (Su-35 Flanker-E) फाइटर जेट खरीदने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। ईरानी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, उनके पायलटों का प्रशिक्षण और अनुबंध संबंधी सभी कागजी औपचारिकताएं संपन्न हो चुकी हैं और अमेरिका के साथ जारी युद्ध के समाप्त होते ही रूस इन सुपर-मैन्यूवरेबल जेट्स की खेप ईरान को सौंप देगा। इस बड़े सैन्य घटनाक्रम ने अमेरिका और इजरायल के रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इससे ईरान की सबसे बड़ी कमजोरी—उसका पुराना वायु रक्षा बेड़ा—रातों-रात बेहद शक्तिशाली हो जाएगा।

ईरान के वायु बेड़े का कायाकल्प: पुराने जेट्स से 4.5 जेनरेशन की लंबी छलांग

दशकों से कड़े अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान की वायुसेना मुख्य रूप से 1970 के दशक के पुराने F-4 फैंटम और F-14 टॉमकैट विमानों पर निर्भर रही है। ऐसे में रूस से मिलने वाले Su-35 लड़ाकू विमान ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों के लिए एक नया जीवनदाता साबित होंगे। यह डील न केवल तेहरान के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को अभेद्य बनाएगी, बल्कि ईरान को मध्य पूर्व के आसमान में अपनी ताकत का दबदबा कायम करने में मदद करेगी। ईरानी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह जेट्स देश के उपग्रह नेटवर्क और आधुनिक जमीनी रडार सिस्टम के साथ मिलकर सुरक्षा का एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करेंगे।

कितना खतरनाक और ताकतवर है रूस का Su-35 सुपर फ्लैंकर लड़ाकू विमान?

सुखोई Su-35 (Sukhoi Su-35) 4.5 पीढ़ी का एक सिंगल-सीट, ट्विन-इंजन और सुपर-मैन्यूवरेबल मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे मूल रूप से हवा में श्रेष्ठता हासिल करने (Air Superiority) के लिए तैयार किया गया है। दो पावरफुल सैटर्न AL-41F1S इंजनों और थ्रस्ट-वेक्टरिंग नोजल से लैस यह विमान हवा में किसी भी कोण पर मुड़ने और असंभव दिखने वाले पैंतरेबाजी (Maneuvers) करने में माहिर है। मैक 2.25 (लगभग 2770 किमी/घंटा) की तेज रफ्तार और बाहरी फ्यूल टैंक के साथ 2200 मील की जबरदस्त रेंज वाला यह विमान हवा से हवा और हवा से जमीन पर लंबी दूरी तक सटीक मार करने वाली घातक मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है। इसका इरबिस-ई (Irbis-E) पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के कई निशानों को एक साथ ट्रैक कर सकता है।

अमेरिका और इजरायल के लिए क्यों बनी खतरे की घंटी?

मध्य पूर्व में इजरायल की सबसे बड़ी ताकत उसकी तकनीकी रूप से उन्नत वायुसेना है, जिसमें अमेरिका से मिले F-35 स्टील्थ फाइटर जेट शामिल हैं। यदि ईरान को 24 से 48 की संख्या में Su-35 फाइटर जेट और साथ ही रूस का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम मिल जाता है, तो इजरायली और अमेरिकी विमानों के लिए ईरानी हवाई सीमा में प्रवेश करना या हवाई हमले करना बेहद जोखिम भरा और जानलेवा हो जाएगा। यही वजह है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और इजरायली खुफिया एजेंसियां रूस और ईरान के बीच मजबूत होते इस सामरिक और सैन्य गठबंधन पर 24 घंटे पैनी नजर बनाए हुए हैं।

क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर पड़ेगा गहरा असर

रूस और ईरान के बीच यह रणनीतिक सैन्य सौदा केवल विमानों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक और सैन्य समीकरणों का स्पष्ट संकेत है। युद्ध के बाद जैसे ही इन फाइटर जेट्स की डिलीवरी शुरू होगी, ईरान की वायुसेना का कायाकल्प हो जाएगा। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी इजरायल इस संभावित खतरे का मुकाबला करने के लिए अपनी कौन सी नई सुरक्षा रणनीति बनाते हैं।