9/11 से पहले ही ओसामा बिन लादेन की 'हिट लिस्ट' में था भारत! अमेरिकी खुफिया एजेंसी के डीक्लासिफाइड दस्तावेजों में सनसनीखेज खुलासा
11 सितंबर 2001 (9/11) को अमेरिका के ट्विन टावर्स और पेंटागन पर हुए भीषण आतंकी हमले ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया था। इस हमले के मास्टरमाइंड और कुख्यात आतंकी संगठन अलकायदा (Al-Qaeda) के सरगना ओसामा बिन लादेन को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA और FBI) के डीक्लासिफाइड दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिका की धरती पर हवाई जहाजों से तबाही मचाने से काफी पहले ही भारत लादेन और उसके आतंकी नेटवर्क की 'प्राइम हिट लिस्ट' में शामिल था। लादेन केवल पश्चिमी देशों से ही नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और आर्थिक प्रगति को भी गहरे आघात पहुंचाने की साजिश रच रहा था।
1990 के दशक से ही रची जा रही थी भारत विरोधी साजिश
अमेरिकी आतंकवाद रोधी विशेषज्ञों और खुफिया दस्तावेजों की समीक्षा से स्पष्ट होता है कि 1996 में अफगानिस्तान लौटने के बाद ओसामा बिन लादेन ने भारतीय उपमहाद्वीप पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया था:
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पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुटों से गठजोड़: लादेन ने हरकत-उल-अंसार (बाद में हरकत-उल-मुजाहिदीन), लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे भारत विरोधी आतंकी संगठनों को धन, हथियार और ट्रेनिंग मुहैया कराई थी।
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कंधार विमान अपहरण (IC-814) का कनेक्शन: 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के अपहरण के पीछे अलकायदा और तालिबान का सीधा साजो-सामान सहयोग था। इस घटना के बाद मसूद अजहर की रिहाई ने भारत के खिलाफ अलकायदा के मंसूबों को और हवा दी थी।
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भारतीय दूतावासों की रेकी: खुफिया फाइलों से यह खुलासा भी हुआ कि 1998 में केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर किए गए बम धमाकों के दौर में ही अलकायदा ने दक्षिण एशिया और खाड़ी देशों में भारतीय मिशनों की भी निगरानी करवाई थी।
लादेन की 'हिट लिस्ट' में कौन से भारतीय ठिकाने थे?
खुफिया विश्लेषकों के अनुसार, अलकायदा का मकसद भारत में किसी बड़े प्रतीकात्मक और आर्थिक केंद्र पर हमला कर व्यापक अस्थिरता पैदा करना था:
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परमाणु और रक्षा प्रतिष्ठान: लादेन भारत की परमाणु क्षमताओं को लेकर हमेशा चिंतित रहता था और उसके लड़ाके भारतीय सैन्य और अनुसंधान ठिकानों की जानकारियां जुटाने की फिराक में थे।
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आर्थिक राजधानी मुंबई और दिल्ली के प्रशासनिक केंद्र: 9/11 हमले से पहले ही लादेन के नेटवर्क ने भारत के प्रमुख वित्तीय संस्थानों, संसद भवन और वाणिज्यिक केंद्रों को निशाना बनाने की योजना पर काम शुरू किया था, जिसे बाद में उसके सहयोगी संगठनों ने अंजाम देने की कोशिश की।
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धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल: भारत के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने के लिए प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आत्मघाती हमलों का खाका तैयार किया गया था।
9/11 के बाद भारत ने दुनिया को दी थी चेतावनी
9/11 हमले के तुरंत बाद भारत के तत्कालीन नेतृत्व और सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट किया था कि आतंकवाद को 'क्षेत्रीय' या 'वैश्विक' के रूप में बांटना एक भारी भूल है। भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का दंश झेल रहा था, जिसे पश्चिमी देश लंबे समय तक स्थानीय कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानते रहे। सीआईए के दस्तावेजों से यह प्रमाणित हुआ कि लादेन का नेटवर्क एक एकीकृत वैश्विक जिहादी एजेंडे पर काम कर रहा था, जिसमें अमेरिका और भारत दोनों उसके प्राथमिक दुश्मन थे।
एबटाबाद रेड से बरामद फाइलों में भी मिले थे भारत से जुड़े दस्तावेज
मई 2011 में जब अमेरिकी नेवी सील्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में स्थित लादेन के गुप्त ठिकाने पर हमला कर उसे ढेर किया था, तब वहां से हजारों कंप्यूटर हार्ड ड्राइव और कागजात बरामद हुए थे। इन दस्तावेजों में भी भारतीय सुरक्षा बलों की गतिविधियों, कश्मीर मुद्दे और भारत में जिहादी नेटवर्क के विस्तार की रणनीतियों से जुड़ी कई गुप्त डायरियां और पत्र मिले थे। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण था कि अपनी मौत के समय तक लादेन भारत के खिलाफ साजिशें रचने में लगातार लगा हुआ था।
भारतीय खुफिया एजेंसियों की सतर्कता ने टाले बड़े खतरे
भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ (R&AW) और आईबी (IB) ने 1990 और 2000 के शुरुआती दशकों में पश्चिमी खुफिया तंत्र के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग कर अलकायदा के कई खतरनाक मंसूबों को समय रहते नाकाम किया। आज भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और सुरक्षा एजेंसियां अलकायदा के भारतीय उपमहाद्वीप विंग (AQIS) के स्लीपर सेल्स पर लगातार शिकंजा कस रही हैं।