'एक हमले में सब खत्म कर सकता हूं', ईरान के अंतिम संस्कार पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, खामेनेई के आंसूओं को बताया 'फर्जी'

'एक हमले में सब खत्म कर सकता हूं', ईरान के अंतिम संस्कार पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, खामेनेई के आंसूओं को बताया 'फर्जी'

ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर वैश्विक राजनीति में एक नया उबाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्यक्रम को लेकर बेहद तीखी और विवादास्पद टिप्पणी की है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की बची हुई पूरी लीडरशिप इस अंतिम संस्कार में एक साथ मौजूद है और यदि वे चाहें, तो एक हमले में पूरी लीडरशिप का सफाया कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें ईरान के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना है।

'फर्जी आंसू' और ट्रंप का तंज

ईरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान उमड़ी भारी भीड़ और लोगों को रोते हुए देखकर ट्रंप ने उन पर तंज कसा है। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता था कि लोग खामेनेई से नफरत करते हैं, शायद ये आंसू फर्जी हैं।" ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए अर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास के जरिए सोशल मीडिया पर जवाब दिया। ईरान ने कहा, "ट्रंप इन संवेदनाओं को नहीं समझ सकते, क्योंकि उनके पास न तो सभ्यता है, न इतिहास और न ही सम्मान।"

सुरक्षा के घेरे में अंतिम संस्कार, ईरान की सख्त चेतावनी

खामेनेई के अंतिम संस्कार में दुनिया भर से शिया समुदाय के लोग जुट रहे हैं, जिससे करोड़ों की भीड़ का अनुमान है। भीड़ को संभालने में संभावित चूक और सुरक्षा खतरों के बीच, ईरान को अमेरिका और इजरायल द्वारा हमले का डर सता रहा है। इसी के मद्देनजर ईरानी सरकार ने एक सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि इस दौरान किसी भी तरह का हमला हुआ, तो इसका 'तीखा जवाब' दिया जाएगा। सरकारी मीडिया के अनुसार, इतनी बड़ी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति में हजारों लोगों के हताहत होने की भी आशंका जताई जा रही है।

कूटनीति बनाम सैन्य शक्ति

ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनके पास ईरान के शीर्ष नेतृत्व को एक झटके में खत्म करने की क्षमता है, लेकिन वे वार्ता का विकल्प चुन रहे हैं। ट्रंप का तर्क है, "अगर मैं उन्हें खत्म कर देता हूं, तो मैं बात किससे करूंगा?" यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच शांति समझौते के आसार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि खामेनेई का अंतिम संस्कार चार दिनों तक चलेगा और 9 जुलाई को उन्हें उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ईरान के लिए यह न केवल एक शोक का समय है, बल्कि अपने अस्तित्व और सुरक्षा को साबित करने की एक बड़ी चुनौती भी है।

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