ग्लोबल टूरिज्म में बंपर उछाल, लेकिन स्थानीय समुदायों की जेब अब भी खाली: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ग्लोबल टूरिज्म में बंपर उछाल, लेकिन स्थानीय समुदायों की जेब अब भी खाली: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली/जिनेवा। कोरोना महामारी के लंबे झटके के बाद वैश्विक यात्रा और पर्यटन उद्योग (Global Travel & Tourism Industry) ने जोरदार वापसी की है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, होटल बुकिंग और सैलानियों की संख्या में लगातार हो रहा इजाफा यह साबित करता है कि पर्यटन क्षेत्र पूरी तरह पटरी पर लौट चुका है। हालांकि, इस आर्थिक उछाल के पीछे एक बेहद चिंताजनक और असमान तस्वीर उभरकर सामने आई है। विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum - WEF) द्वारा जारी किए गए नवीनतम यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक और रिपोर्ट में यह कड़वी सच्चाई सामने आई है कि वैश्विक स्तर पर पर्यटन के पुनरुद्धार की गति जिस तेजी से बढ़ी है, उसके अनुरूप स्थानीय समुदायों (Local Communities) को उसका वास्तविक आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से होने वाली रिकॉर्ड कमाई का एक बड़ा हिस्सा बहुराष्ट्रीय कंपनियों, बड़ी एयरलाइंस शृंखलाओं, लक्जरी होटल समूहों और वैश्विक ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों (OTAs) के खातों में केंद्रित होकर रह गया है। वहीं दूसरी ओर, जिन प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटक भारी संख्या में उमड़ रहे हैं, वहां के मूल निवासियों को अनियंत्रित भीड़, बेतहाशा महंगाई, संसाधनों की किल्लत और पर्यावरणीय गिरावट का दंश झेलना पड़ रहा है।

रिकॉर्ड राजस्व के बावजूद स्थानीय आबादी हाशिए पर: रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट के अनुसार, कई देशों में अंतरराष्ट्रीय सैलानियों के आगमन से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों में तो चमक दिख रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर समावेशी विकास (Inclusive Growth) नदारद है:

  • आर्थिक रिसाव (Economic Leakage): विकासशील और लोकप्रिय पर्यटन देशों में एक पर्यटक द्वारा खर्च किए गए प्रत्येक $100 में से मात्र $5 से $10 ही वास्तव में उस स्थानीय अर्थव्यवस्था में रह पाते हैं। बाकी लगभग 90 फीसदी राशि विदेशी एयरलाइंस, वैश्विक टूर ऑपरेटर्स और बहुराष्ट्रीय होटल ब्रांड्स के पास वापस चली जाती है।

  • असंगठित और कम वेतन वाला रोजगार: स्थानीय युवाओं को मिलने वाले अधिकांश रोजगार मौसमी (Seasonal), कम वेतन वाले और बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के होते हैं। उच्च-स्तरीय प्रबंधकीय पदों और निवेश पर मुनाफे का नियंत्रण बाहरी संस्थाओं के हाथ में ही रहता है।

  • पारंपरिक आजीविका का संकट: कई तटीय, पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रिसॉर्ट्स और बुनियादी ढांचा विकसित होने से स्थानीय किसानों, मछुआरों और पारंपरिक दस्तकारों की भूमि छिन रही है या उनकी पहुंच प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित हो गई है।

ओवरटूरिज्म की मार: रहने की लागत में बेतहाशा वृद्धि और बुनियादी ढांचे पर दबाव

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि पर्यटन में आई अचानक तेजी ने दुनिया के कई प्रमुख शहरों और गंतव्यों में 'ओवरटूरिज्म' (Overtourism) का गंभीर संकट पैदा कर दिया है:

  • आवास संकट (Housing Crisis): बार्सिलोना, वेनिस, एम्स्टर्डम से लेकर भारत के गोवा और मनाली जैसे शहरों में आवासीय संपत्तियों को शॉर्ट-टर्म रेंटल (होमस्टे/एयरबीएनबी) में बदले जाने से स्थानीय किराए में भारी उछाल आया है। स्थानीय निवासियों और मध्यम वर्ग के लिए अपने ही शहर में घर का किराया देना असंभव होता जा रहा है।

  • दैनिक जीवन में महंगाई: पर्यटकों की उच्च क्रय शक्ति के चलते स्थानीय बाजारों में फल, सब्जियां, राशन और परिवहन के दाम कई गुना बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर आम नागरिकों के मासिक बजट पर पड़ा है।

  • संसाधनों की किल्लत: पानी की गंभीर कमी, सीवरेज सिस्टम का चरमराना, ट्रैफिक जाम और कचरे के अनियंत्रित ढेर ने स्थानीय पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

नीतिगत बदलाव की जरूरत: 'वैल्यू ओवर वॉल्यूम' मॉडल अपनाने की सलाह

विश्व आर्थिक मंच ने सभी देशों की सरकारों और पर्यटन नीति-निर्माताओं को अपनी रणनीतियों में आमूलचूल बदलाव करने की कड़ी सिफारिश की है। संस्था का मानना है कि अब समय आ गया है जब किसी देश की पर्यटन सफलता को केवल "सैलानियों के कुल सिर गिनने" (Headcounts) के आधार पर न आंका जाए:

  • कम्युनिटी-लेड टूरिज्म (समुदाय-संचालित पर्यटन): पर्यटन की योजनाओं को तैयार करने और उनका प्रबंधन करने में स्थानीय पंचायतों, नगर पालिकाओं और स्थानीय निवासियों को निर्णय लेने का मुख्य अधिकार मिलना चाहिए।

  • स्थानीय आपूर्ति शृंखला को अनिवार्य करना: बड़े होटलों और रिसॉर्ट्स के लिए यह वैधानिक रूप से अनिवार्य किया जाना चाहिए कि वे अपने कुल खाद्य पदार्थों, सजावटी सामानों और सेवाओं की खरीद का न्यूनतम 50 प्रतिशत स्थानीय किसानों, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों से ही करें।

  • टूरिज्म टैक्स का स्थानीय उपयोग: पर्यटकों पर लगाए जाने वाले पर्यावरण और एंट्री सेस (Tourist Tax) का सीधा उपयोग उस शहर के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन में होना चाहिए, न कि उसे सामान्य राजकोष में मिला दिया जाए।

जब तक पर्यटन उद्योग स्थानीय लोगों के जीवन स्तर, संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा करते हुए उन्हें सीधे आर्थिक रूप से सशक्त नहीं बनाता, तब तक इस क्षेत्र का कोई भी पुनरुद्धार टिकाऊ नहीं माना जा सकता। पर्यटन का असली विकास वही है जहां मेहमान के आनंद के साथ-साथ मेजबान की खुशहाली भी सुनिश्चित हो।