बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर फिर बरपा कहर: अलग-अलग घटनाओं में दो हिंदुओं की निर्मम हत्या से सहमा समुदाय
पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बार फिर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए बेहद डरावनी और झकझोर देने वाली खबरें सामने आ रही हैं। बांग्लादेश में लगातार बढ़ते जा रहे सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामलों में, देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई दो अलग-अलग हिंसक घटनाओं में एक हिंदू स्वर्ण व्यवसायी और एक महिला समेत दो निर्दोष हिंदुओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। इन सनसनीखेज वारदातों के सामने आने के बाद से बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदू समुदायों के भीतर भारी दहशत, असुरक्षा और आक्रोश का माहौल पैदा हो गया है। बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से जिस तरह से सुनियोजित तरीके से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, उसने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और देश के भीतर सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
नौगांव जिले में स्वर्ण व्यवसायी अलिफ चंद्र दत्ता की धारदार हथियारों से हत्या
बांग्लादेश में हुई हिंसा की पहली दर्दनाक घटना नौगांव (Naogaon) जिले के महादेवपुर उपजिला से सामने आई है। यहां रहने वाले 45 वर्षीय हिंदू स्वर्ण व्यवसायी अलिफ चंद्र दत्ता (Alif Chandra Dutta) को अज्ञात हमलावरों ने अपनी खूनी हिंसा का शिकार बनाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह खौफनाक वारदात सोमवार रात की है जब अलिफ चंद्र दत्ता अपनी आभूषण की दुकान बंद करके अपने घर लौट रहे थे। बांग्लादेश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र 'डेली सन' में छपी रिपोर्ट और स्थानीय पुलिस के बयानों के मुताबिक, दत्ता रात करीब 8:30 बजे महादेवपुर बाजार में स्थित अपनी ज्वैलरी की दुकान से निकले थे। जब वे रात लगभग 9 बजे दुललपारा इलाके में स्थित अपने घर के बेहद करीब पहुंचे, तभी घात लगाकर बैठे हमलावरों के एक सशस्त्र गिरोह ने उन्हें अचानक घेर लिया और तेजधार हथियारों से उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
दुकान से सोना और 7 लाख टका नकद लूटकर फरार हुए हमलावर
हमलावरों की यह बरबरता केवल यहीं नहीं रुकी। रिपोर्ट के मुताबिक, क्रूरता की हदें पार करते हुए बदमाशों ने अलिफ चंद्र दत्ता के पास मौजूद सारा सोना और करीब 7 लाख बांग्लादेशी टका नकद लूट लिए और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। इस अचानक हुए जानलेवा हमले के बाद परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर गंभीर रूप से घायल दत्ता को बचाया और आनन-फानन में बेहतर इलाज के लिए राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस सनसनीखेज मामले की पुष्टि करते हुए महादेवपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी उमर फारूक ने मीडिया को बताया कि पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह घटना केवल लूटपाट के इरादे से की गई थी या इसके पीछे कोई गहरी सांप्रदायिक रंजिश या अन्य दुर्भावनापूर्ण मकसद छिपा हुआ था। पुलिस ने इस संबंध में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
कॉक्स बाजार में घर के भीतर घुसकर हिंदू महिला रानी सुशील की चाकू मारकर हत्या
दूसरी दिल दहला देने वाली घटना कॉक्स बाजार (Cox's Bazar) जिले के महेशखली उपजिला से सामने आई है। यहां होनोक यूनियन में रहने वाली 45 वर्षीय हिंदू महिला रानी सुशील (Rani Sushil) की उनके ही घर के भीतर बेरहमी से चाकू गोदकर हत्या कर दी गई। यह दुखद घटना सोमवार की शाम करीब 7:30 बजे की है जब एक अज्ञात और शातिर घुसपैठिया चोरी करने के नापाक इरादे से उनके घर में दाखिल हुआ था। बांग्लादेशी बंगाली दैनिक अखबार 'प्रोथोम आलो' में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, घटना के समय रानी सुशील अपने घर की रसोई में खाना बनाने के कार्य में व्यस्त थीं। तभी अचानक एक अनजान व्यक्ति चुपके से उनके घर के अंदर घुस आया। जैसे ही रानी की नजर उस घुसपैठिए पर पड़ी, उन्होंने अपनी और अपने परिवार की रक्षा के लिए तुरंत जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया।
'चोर-चोर' चिल्लाने पर क्रूर हमलावर ने महिला के चेहरे को दबोचकर कई बार गोदा
स्थानीय लोगों और पुलिस द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जब रानी सुशील ने अज्ञात घुसपैठिए को घर में देखा तो उन्होंने घबराने के बजाय हिम्मत दिखाते हुए 'चोर, चोर' कहकर शोर मचाना शुरू कर दिया। अपनी चोरी पकड़े जाने के डर से बौखलाए उस खूंखार घुसपैठिए ने तुरंत आगे बढ़कर बेरहमी से रानी का चेहरा कसकर दबोच लिया ताकि वे और अधिक आवाज न निकाल सकें। इसके बाद उस क्रूर हमलावर ने बेरहमी से उन पर ताबड़तोड़ चाकू से कई वार किए और खून से लथपथ हालत में छोड़कर मौके से फरार हो गया। इस हमले के बाद जब आसपास के लोग इकट्ठा हुए, तो उन्होंने घायल रानी को तुरंत चकारिया उपजिला हेल्थ कॉम्प्लेक्स पहुंचाया, जहां कुछ ही घंटों बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। महेशखली पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज अब्दुस सुल्तान ने बताया कि शुरुआती तफ्तीश से यह मामला चोरी के दौरान विरोध करने पर हत्या का प्रतीत होता है, और पुलिस हमलावर की तलाश में जुटी है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और खासकर हिंदुओं पर लगातार बढ़ रहे जानलेवा हमले
बांग्लादेश में घटित ये दोनों ताजा और वीभत्स हत्याएं कोई इकलौती घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह उस लंबी और खौफनाक श्रृंखला का हिस्सा हैं जो देश में लगातार बेकाबू होती जा रही है। इन वारदातों से कुछ ही दिन पहले बांग्लादेश के रंगपुर शहर में एक सेवानिवृत्त हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके परिवार के तीन अन्य सदस्यों की अत्यंत बेरहमी से घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी। पिछले कुछ समय से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदायों, उनके धार्मिक स्थलों, संपत्तियों और जीवन पर लगातार हमले बढ़ते जा रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूर्व की अंतरिम सरकार के कार्यकाल से शुरू हुआ यह अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का सिलसिला मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) शासनकाल में भी बदस्तूर जारी है, जिससे वहां की बहुसंख्यक आबादी के बीच अल्पसंख्यक खुद को पूरी तरह असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश सरकार से यह मांग की जा रही है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कड़े और ठोस कदम उठाए, अन्यथा वहां का सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह से बिखर जाएगा।