पैकेट पर अब दिखेगा लाल खतरे का निशान: ज्यादा शुगर, नमक या फैट हुआ तो लगेगा बड़ा Red Alert; सुप्रीम कोर्ट में FSSAI का एक्शन प्लान
सुपरमार्केट के शेल्फ पर सजे रंग-बिरंगे चिप्स, बिस्किट, भुजिया, पैकेज्ड जूस और इंस्टेंट नूडल्स के पैकेट अब सिर्फ लुभावने विज्ञापनों और 'हेल्दी' दावों के दम पर ग्राहकों को नहीं लुभा सकेंगे। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश के खाद्य सुरक्षा इतिहास में सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए पैकेज्ड फूड के लिए फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल (Front-of-Pack Warning Label) का औपचारिक प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रख दिया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अगुवाई वाली पीठ के कड़े रुख के बाद नियामक ने यह स्पष्ट किया है कि जिन भी खाद्य उत्पादों में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट तय सीमा से अधिक होगा, उनके पैकेट के सामने के हिस्से पर लाल रंग का बड़ा स्टॉप-साइन जैसा खतरे का निशान (Red Hexagonal Warning) लगाना अनिवार्य किया जाएगा। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना, जयपुर समेत देश के तमाम शहरों में खराब खान-पान की आदतों से बढ़ रही लाइफस्टाइल बीमारियों के बीच यह बदलाव जनस्वास्थ्य के लिहाज से मील का पत्थर साबित हो सकता है।
कैसा होगा नया रेड वॉर्निंग लेबल और पैकेट पर क्या लिखा दिखेगा?
नियामक द्वारा शीर्ष अदालत में दाखिल किए गए छह पन्नों के अनुपालन हलफनामे के मुताबिक, अब पैकेट के पीछे बारीक अक्षरों में न्यूट्रिशनल चार्ट ढूंढने की जरूरत खत्म हो जाएगी। नया वॉर्निंग लेबल ट्रैफिक के 'STOP' संकेत की तरह छह कोनों वाला लाल हेक्सागोन होगा। इस लाल निशान के भीतर स्पष्ट और बड़े अक्षरों में यह घोषित किया जाएगा कि उत्पाद में कौन सा तत्व स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। खाद्य सामग्री के अनुसार उस पर 'HIGH SUGAR' (अत्यधिक चीनी), 'HIGH SALT' (अत्यधिक नमक), 'HIGH FAT' (अत्यधिक फैट) या 'HIGHLY SWEETENED BEVERAGE' (अत्यधिक मीठा पेय) लिखना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, यह चेतावनी पैकेट के पीछे छपने वाले न्यूट्रिशन टेबल के फॉन्ट साइज से कम से कम एक पॉइंट बड़े फॉन्ट में दर्ज होगी, ताकि किसी भी उम्र का व्यक्ति बिना चश्मा लगाए या बिना उलझे इसे तुरंत पहचान सके।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद जागी व्यवस्था: बच्चों में मोटापा और डायबिटीज पर चिंता
यह ऐतिहासिक पहल तब संभव हुई जब '3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी' नामक गैर-सरकारी संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नियामक संस्था की ढिलाई पर भारी नाराजगी जाहिर की थी। शीर्ष अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा था कि क्या सरकार और नियामक यह चाहते हैं कि देश के नागरिक और बढ़ते बच्चे अस्वस्थ खान-पान के शिकार होते रहें? देश में बच्चों के भीतर तेजी से बढ़ रहा मोटापा (Childhood Obesity), कम उम्र में टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर की मुख्य वजह प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में जरूरत से ज्यादा छिपी एडेड शुगर, सोडियम और पाम ऑयल जैसे सैचुरेटेड फैट हैं। चिप्स के एक छोटे पैकेट या कार्बोनेटेड ड्रिंक की एक बोतल में अक्सर पूरे दिन की सुझाई गई नमक या चीनी की सीमा से अधिक सामग्री मौजूद होती है, जिसकी जानकारी आम उपभोक्ता को नहीं मिल पाती थी।
दो चरणों में लागू करने की योजना और 80% उपभोक्ताओं का सख्त रुख
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में यह प्रस्ताव रखा है कि इस नए नियम को दो चरणों में लागू किया जाए, ताकि फूड प्रोसेसिंग कंपनियों को अपने उत्पादों का फॉर्मूलेशन बदलने और नए पैकेजिंग डिजाइन तैयार करने का समय मिल सके। पहले चरण में यह लाल वॉर्निंग लेबल केवल उन्हीं प्रोडक्ट्स पर लगाने का प्रस्ताव है जिनमें चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट में से कम से कम दो या उससे अधिक तत्व तय सीमा से ऊपर पाए जाएंगे। वहीं दूसरे चरण में इसे उन उत्पादों पर भी लागू किया जाएगा जिनमें कोई एक पोषक तत्व भी तय सीमा से अधिक होगा। हालांकि, स्वतंत्र कंज्यूमर सर्वे प्लेटफॉर्म 'लोकल सर्कल्स' के एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में करीब 80% भारतीय उपभोक्ताओं ने मांग की है कि यह चेतावनी पहले दिन से ही लागू होनी चाहिए, भले ही उत्पाद में केवल एक ही हानिकारक तत्व तय सीमा पार कर रहा हो। उपभोक्ताओं का तर्क है कि बिस्किट और मीठे पेय पदार्थों में मुख्य रूप से सिर्फ चीनी अधिक होती है, ऐसे में दो तत्वों की अनिवार्यता से कई अस्वास्थ्यकर चीजें पहले चरण में चेतावनी के दायरे से बाहर रह जाएंगी।
किन खाद्य पदार्थों को मिलेगी छूट और रोजमर्रा की थाली पर क्या होगा असर?
इस नए नियम के तहत कुछ बुनियादी पारंपरिक सामग्रियों को फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग से बाहर रखने का प्रस्ताव किया गया है। हलफनामे के अनुसार, सिंगल इंग्रीडिएंट (एकल घटक वाले उत्पाद) जैसे शुद्ध देसी घी, सरसों या तिल का खाने का तेल, पिसा हुआ सादा नमक, चीनी, गुड़ और प्राकृतिक शहद को इस लाल हेक्सागोनल वॉर्निंग से छूट दी जाएगी, क्योंकि ये बुनियादी कच्ची सामग्रियां हैं और इनमें कोई अतिरिक्त फ्लेवर या कृत्रिम प्रोसेसिंग नहीं होती। यह नियम पूरी तरह से उन प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड आइटम्स पर लागू होगा जो कारखानों में तैयार होकर तुरंत खाने या पीने के लिए बेचे जाते हैं। इसका सीधा असर बड़ी एफएमसीजी कंपनियों (FMCG Brands) पर पड़ेगा, जिन्हें अब अपने चिप्स, रेडी-टू-ईट नमकीन, चॉकलेट, बेकरी प्रोडक्ट्स और पैकेज्ड ड्रिंक्स में सोडियम और शुगर का स्तर घटाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, अन्यथा पैकेट पर छपा बड़ा लाल निशान उनकी बिक्री को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।