अमेरिका-ईरान में बनी सीक्रेट डील? दोहा की बंद कमरों वाली बातचीत से आए चौंकाने वाले संकेत
मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी भारी तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है. कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच बेहद गोपनीय और अप्रत्यक्ष (Indirect) बातचीत हुई है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. इस ताजा बैठक से कुछ ऐसे सकारात्मक संकेत मिले हैं जो आने वाले दिनों में खाड़ी देशों की सूरत बदल सकते हैं. दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने पहले से तय समझौता ज्ञापन (MoU) को अमलीजामा पहनाने के रास्तों पर घंटों माथापच्ची की. इस हाई-प्रोफाइल चर्चा में ईरान की अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को अनलॉक करने, समझौते के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए एक एकदम नया और कड़ा सिस्टम बनाने और दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की सुरक्षा जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों को टेबल पर रखा गया. हालांकि कई मोर्चों पर दोनों महाशक्तियों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं, लेकिन इस बातचीत को पटरी पर लाने में जुटे मध्यस्थ देशों ने जो फीडबैक दिया है, वह वाकई उत्साहजनक है.
आमने-सामने नहीं बैठे प्रतिनिधि, कतर और पाकिस्तान ने संभाली कमान
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से एक बड़ा अपडेट देते हुए उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने पुष्टि की है कि MoU को लागू करने को लेकर चल रहा यह महत्वपूर्ण चरण अब पूरा हो चुका है. दिलचस्प बात यह है कि दोहा के आलीशान होटलों में दोनों धुर विरोधी देशों के राजनयिक एक बार भी आमने-सामने नहीं बैठे. पूरी बातचीत को कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने अलग-अलग कमरों में बैठकर अंजाम दिया. इस दौरान दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने के लिए एक ऐतिहासिक सहमति बनी है. दोनों पक्ष अब इस बात पर राजी हो गए हैं कि समझौते के किसी भी संभावित उल्लंघन को रोकने, उसकी तुरंत जानकारी साझा करने और एक-एक चीज का पुख्ता रिकॉर्ड रखने के लिए बहुत जल्द एक 'विशेष संचार चैनल' (Special Communication Channel) यानी हॉटलाइन स्थापित की जाएगी. गरीबाबादी का मानना है कि यह नया ढांचा भविष्य में किसी भी अचानक पैदा होने वाले बड़े विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने में लाइफलाइन साबित होगा.
3 अरब डॉलर के फंड पर फंसा पेंच, अमेरिका ने रखी कड़क शर्त
इस सीक्रेट मीटिंग के बाद अरब मीडिया की गलियों से एक और सनसनीखेज दावा सामने आया. रिपोर्ट्स में कहा गया कि दोहा वार्ता में ईरान की फ्रीज पड़ी संपत्ति में से लगभग 3 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि जारी करने पर एक शुरुआती सहमति बन गई है, जिसे किश्तों में ईरान को सौंपने का प्लान है. लेकिन जैसे ही यह खबर फैली, अमेरिकी खेमे ने इस पर तुरंत ब्रेक लगा दिया. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ लहजे में स्पष्ट किया कि फिलहाल वॉशिंगटन ने ईरान का एक भी डॉलर रिलीज नहीं किया है. अमेरिका ने अपनी शर्त साफ कर दी है कि तेहरान को फंड तभी मिलेगा जब वह MoU की हर एक शर्त को पूरी तरह मानेगा. इतना ही नहीं, अगर भविष्य में यह रकम जारी भी होती है, तो ईरान अपनी मर्जी से इसे खर्च नहीं कर पाएगा. अमेरिका की अंतिम मंजूरी के बाद इस धन का उपयोग सिर्फ मानवीय जरूरतों, खासकर अमेरिकी किसानों से कृषि उत्पाद खरीदकर ईरान की आम जनता तक खाना और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए ही किया जा सकेगा.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान विवाद पर आर-पार की बहस
त्रिपक्षीय बैठक में सिर्फ पैसों की बात नहीं हुई, बल्कि मिडिल ईस्ट के सबसे सुलगते क्षेत्र लेबनान और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रणनीतिक रूट पर भी तीखी बहस हुई. ईरान ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि लेबनान के भीतर इजरायल की सैन्य मौजूदगी इस शांति समझौते को जमीन पर उतारने में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है. इसके साथ ही तेहरान ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर हुंकार भरते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान और ओमान की संप्रभुता का हर हाल में सम्मान होना चाहिए. ईरान ने साफ किया है कि किसी भी बड़ी और व्यापक डील से पहले उसकी 5 प्रमुख शर्तों को मानना होगा. दूसरी ओर, ओमान की तरफ से भी टेबल पर एक नया शांति प्रस्ताव रखा गया है, जिस पर दोनों देशों के प्रतिनिधि अपने-अपने मुख्यालयों में शीर्ष नेतृत्व से सलाह-मशविरा करने के बाद ही अगला कदम उठाएंगे.
ट्रंप के करीबियों ने तैयार की थी स्क्रिप्ट, 60 दिनों का मिला है अल्टीमेटम
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर इस पूरी बातचीत को 'सकारात्मक प्रगति' करार दिया है. उन्होंने बताया कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन से जुड़े कई पेचीदा मुद्दों पर दोनों पक्ष आगे बढ़ने को तैयार हैं. हालांकि, अगली बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों के संपन्न होने के बाद ही बुलाई जाएगी. अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस पूरी वार्ता की पटकथा बेहद सधे हुए अंदाज में लिखी गई थी. मंगलवार रात से शुरू होकर बुधवार तक चली इस मैराथन बैठक से ठीक पहले अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी सलाहकार व दामाद जारेड कुशनर ने कतर के प्रधानमंत्री के साथ एक क्लोज-डोर मीटिंग की थी, जहां इस बातचीत का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया.
अमेरिका का सीधा गणित है कि यदि ईरान एक व्यापक परमाणु समझौते को मान लेता है, तो उसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली कमाई की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ा वैश्विक आर्थिक फायदा मिल सकता है. दोनों देशों ने पहले समझौता ज्ञापन पर साइन करते समय 60 दिनों के भीतर इस महा-परमाणु समझौते को पूरा करने का टारगेट रखा था, और दोहा की यह बैठक उसी दिशा में सबसे बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है.