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April 18 2026 03:39 am

लोकसभा में महिला आरक्षण अब 6 राज्य मिलकर तय करेंगे दिल्ली का भविष्य, बदल जाएगा 400 सीटों का समीकरण

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News India Live, Digital Desk: देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव की सुगहाट तेज हो गई है। महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के लागू होने के बाद भारतीय लोकतंत्र की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस कानून का असली असर केवल महिलाओं की भागीदारी तक सीमित नहीं है? दरअसल, आगामी परिसीमन के बाद देश के 6 बड़े राज्य लोकसभा की राजनीति में 'किंगमेकर' की भूमिका में आ जाएंगे। इन राज्यों में सीटों की संख्या बढ़कर 400 के करीब पहुंचने का अनुमान है, जो केंद्र की सत्ता का रास्ता तय करेंगे।

परिसीमन और महिला आरक्षण का गहरा कनेक्शन

महिला आरक्षण कानून के प्रावधानों के अनुसार, इसे जनगणना और उसके बाद होने वाले निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद ही लागू किया जा सकता है। जानकारों का मानना है कि उत्तर भारत के राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि के कारण सीटों की संख्या में भारी इजाफा होगा। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों में से इन 6 राज्यों की हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन नए फॉर्मूले के बाद यह आंकड़ा चौंकाने वाला हो सकता है।

इन 6 राज्यों में बढ़ेगा सीटों का दबदबा

आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिलते हैं कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, परिसीमन के बाद इन 6 राज्यों के पास सामूहिक रूप से लगभग 400 सीटें हो सकती हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि जो दल इन राज्यों में बढ़त बनाएगा, उसके लिए सत्ता के शिखर तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।

दक्षिण बनाम उत्तर: राजनीति की नई चुनौती

सीटों के इस संभावित बंटवारे ने एक नई बहस को भी जन्म दे दिया है। दक्षिण भारतीय राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, ऐसे में सीटों के बढ़ने का फायदा केवल उत्तर भारतीय राज्यों को मिलना उनके साथ अन्याय होगा। हालांकि, महिला आरक्षण के लागू होने से संसद में महिलाओं की संख्या 181 तक पहुंच जाएगी, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

कब लागू होगा नया समीकरण?

फिलहाल सबकी नजरें जनगणना पर टिकी हैं। जनगणना के आंकड़े आने के बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा, जो नई सीमाओं और सीटों का निर्धारण करेगा। माना जा रहा है कि 2029 या उसके बाद के चुनावों में हमें यह नई और बदली हुई संसद देखने को मिल सकती है, जहां महिलाओं की आवाज और भी बुलंद होगी और राज्यों का सियासी वजन भी बदला हुआ नजर आएगा।