संसद का शीतकालीन सत्र या सियासी युद्ध? कांग्रेस ने पीएम मोदी के लिए तैयार कर दी है प्रश्नों की लंबी लिस्ट
News India Live, Digital Desk: दिल्ली की सर्दी तो बढ़ रही है, लेकिन संसद भवन के अंदर का माहौल तप रहा है। शीतकालीन सत्र (Winter Session) चल रहा है और उम्मीद के मुताबिक, विपक्ष शांत बैठने के मूड में बिल्कुल नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सदन में अपनी बात रखने या चर्चा के लिए आते हैं, तो उससे पहले ही कांग्रेस ने सवालों की एक बौछार कर दी है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं ने सोशल मीडिया और सदन के पटल पर प्रधानमंत्री से कुछ ऐसे सवाल पूछे हैं, जिनका जवाब जनता भी अरसे से ढूंढ रही है।
"हिसाब दीजिये, भाषण नहीं"
कांग्रेस का कहना साफ़ है कि प्रधानमंत्री अक्सर अपने भाषणों में "भविष्य के सुनहरे सपने" दिखाते हैं या फिर इतिहास (नेहरू-गांधी परिवार) को कोसते हैं, लेकिन जो वर्तमान (Today) की समस्याएं हैं, उन पर खामोश रह जाते हैं।
कांग्रेस ने पीएम मोदी को इन अहम मुद्दों पर घेरा है:
- आसमान छूती महंगाई: कांग्रेस ने पूछा है कि आखिर कब तक "अच्छे दिनों" का इंतज़ार करें? टमाटर-प्याज और दाल की कीमतें आम आदमी की थाली से गायब हो रही हैं। पीएम मोदी इस पर एक शब्द क्यों नहीं बोलते?
- बेरोजगारी का संकट: युवा डिग्रियां लेकर घूम रहे हैं। सरकारी भर्तियां लटकी पड़ी हैं या पेपर लीक हो जाते हैं। कांग्रेस ने सीधा सवाल किया—"हर साल 2 करोड़ नौकरियों का वादा था, वो नौकरियां हैं कहाँ?"
- सीमा पर चीन: यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सरकार अक्सर बैकफुट पर रहती है। विपक्ष का आरोप है कि सीमा पर स्थिति गंभीर है, चीन हमारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पीएम मोदी देश को "सब चंगा सी" बता रहे हैं।
- किसानों की आय: "2022 तक किसानों की आय दोगुनी" करने का वादा था। अब तो 2025 ख़त्म होने को है, आय दोगुनी हुई या लागत दोगुनी हो गई? इसका जवाब कौन देगा?
जाति जनगणना पर 'पेंच'
इन सबके बीच, कांग्रेस ने जातिगत जनगणना (Caste Census) के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया है। राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस मांग कर रही है कि देश में एक्सरे होना चाहिए ताकि पता चले किसके पास कितनी दौलत है और किसकी कितनी हिस्सेदारी है। पीएम मोदी इस पर अपनी स्थिति साफ़ क्यों नहीं करते?
सदन चलने देंगे या हंगामा होगा?
जिस तरह से कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाया है, उसे देखकर लगता नहीं कि यह सत्र शांति से गुजरेगा। जयराम रमेश ने साफ़ कह दिया है कि "प्रधानमंत्री सवालों से भाग नहीं सकते।" अब गेंद पीएम मोदी के पाले में है। देखना दिलचस्प होगा कि जब वो सदन में बोलने खड़े होंगे, तो क्या वे विपक्ष के इन तीखे सवालों का "पॉइंट-टू-पॉइंट" जवाब देंगे या फिर अपने चिर-परिचित अंदाज में विपक्ष पर ही सवाल दाग देंगे?
जनता सब देख रही है। संसद सिर्फ़ हल्ला-गुल्ला करने की जगह नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का मंच है, और कांग्रेस इस बार उसे उसी तरह इस्तेमाल कर रही है।