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March 28 2026 10:09 am

कन्या पूजन में लांगुरिया के बिना क्यों अधूरा है पुण्य? जानिए बटुक भैरव और कंजक पूजन का गहरा नाता

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News India Live, Digital Desk: चैत्र नवरात्रि के समापन पर कन्या पूजन (Kanjak Pujan) का विशेष विधान है। नौ कन्याओं को साक्षात माँ दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजा जाता है, लेकिन इस पूजन में एक छोटे बालक का होना अनिवार्य माना गया है, जिसे लोक भाषा में 'लांगुरिया' (Languriya) कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कन्या पूजन में लांगुरिया शामिल न हो, तो माँ दुर्गा उस पूजा को स्वीकार नहीं करतीं। आइए जानते हैं इसके पीछे का पौराणिक रहस्य और 'बटुक भैरव' का महत्व।

क्यों जरूरी है लांगुरिया (बालक) का होना?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने माँ शक्ति की सेवा और सुरक्षा के लिए अपने ही अंश 'बटुक भैरव' को नियुक्त किया था। कन्या पूजन में शामिल होने वाला छोटा बालक इसी बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है।

सुरक्षा का प्रतीक: जैसे भैरव बाबा माँ दुर्गा के द्वारपाल और रक्षक हैं, वैसे ही लांगुरिया कन्याओं (देवियों) की सुरक्षा का प्रतीक है।

पूर्णता का प्रतीक: तंत्र शास्त्र और पुराणों के अनुसार, देवी की पूजा तब तक पूर्ण नहीं होती जब तक उनके साथ भैरव की पूजा न की जाए। इसीलिए नौ कन्याओं के साथ एक बालक को जिमाना अत्यंत शुभ और अनिवार्य है।

हनुमान जी और लांगुरिया का संबंध

उत्तर भारत, विशेषकर राजस्थान और ब्रज क्षेत्र में 'लांगुरिया' को हनुमान जी का बाल रूप भी माना जाता है। लोक गीतों में माँ कैला देवी और माँ दुर्गा के साथ लांगुरिया (हनुमान जी) के संवाद बहुत प्रसिद्ध हैं। हनुमान जी को माँ जगदंबा का परम भक्त और सेवक माना गया है, इसलिए कन्या पूजन में बालक को लांगुरिया के रूप में बैठाकर उनकी सेवा की जाती है।

कन्या पूजन की सही विधि और नियम (Kanya Pujan Vidhi)

संख्या: आदर्श रूप से 9 कन्याएं और 1 बालक (लांगुरिया) होना चाहिए। यदि 9 कन्याएं न मिलें, तो कम से कम 2 कन्याओं के साथ भी पूजन किया जा सकता है।

चरण पखारना: कन्याओं और बालक के घर प्रवेश करते ही उनके पैर धोएं और उन्हें साफ आसन पर बैठाएं।

भोजन: उन्हें हलवा, पूरी और काले चने का सात्विक भोजन कराएं। लांगुरिया को भी उतना ही सम्मान और भोजन दें जितना कन्याओं को।

दक्षिणा और विदाई: भोजन के बाद उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाएं, कलाई पर कलावा बांधें और सामर्थ्य के अनुसार फल, मिठाई या दक्षिणा देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।